चिलकाना क्षेत्र के खेतों में भरा मसखरा नदी की बाढ़ का पानी। संवाद
- फोटो : सिविल लाइन स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में मौजूद शरद पाठक बाबा व दियरा राज परिवार से जुड़े लोग।
लखनौती/चिलकाना। हथिनीकुंड बैराज से मंगलवार को छोड़ा गया पानी देर शाम खादर क्षेत्र में पहुंचा जिसने यमुना किनारे जबरदस्त कटाव शुरू कर दिया। सैकड़ों बीघा फसल पानी में बह गई। उधर, चिलकाना क्षेत्र में भी मसखरा नदी का पानी खेतों में भर गया है।
लखनौती क्षेत्र के खालिद, आरिफ, इमरान, मुकीम आदि ग्रामीणों ने बताया कि जलस्तर बढ़ने से सैकड़ों बीघा जमीन यमुना में समा गई है। ग्रामीणों ने बताया कि जब्बार उर्फ गोलू का 16 बीघा गन्ना, हाजी वकील का 20 बीघा उड़द, साजिदा, मोहसिन, वसीम, शमशीर, सलीम के 36 बीघा उड़द, इलियास का 10 बीघा गन्ना, अलिमू के 10 बीघा उड़द पानी में बह गए। मजीद के 20 बीघा, जिंदा के 20 बीघा, तासीन के 30 बीघा , जब्बार के 16 बीघा, भोल्लर प्रधान के 20 बीघा उड़द कटाव की भेंट चढ़ गए हैं। राजस्व विभाग की टीम भी बर्बाद हुई फसलों का सर्वे करने में जुट गई है।
चिलकाना में पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी अचानक मसखरा नदी में आ गया है। नदी का पानी ओवरफ्लो होकर खादर क्षेत्र में फैल गया है। खादर क्षेत्र में पानी आने से धान की फसल पूरी तरह से डूब चुकी है। सुल्तानपुर धौलाहेड़ी मार्ग पर निर्माणाधीन पुल का काम रुक गया और मशीनें पानी में डूब गई हैं। बाढ़ के पानी से सबसे ज्यादा धान और हरे चारे की फसल को नुकसान है। पॉपुलर के पेड़ तथा गन्ना भी इसकी चपेट में है। देर शाम तक बाढ़ का पानी धीरे-धीरे बढ़ रहा था। मसखरा नदी का पानी गांव नथमलपुर, रावणपुर, बहादरा के जंगल में फैल कर चल रहा है।