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अकेले दादा के बूढ़े कंधों पर दो पौत्रियों के भविष्य की जिम्मेदारी

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माता-पिता के बाद मां की जिम्मेदारी संभाल रही दादी की भी कोरोना के चलते हुई मौत
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अमर उजाला अपनत्व अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना महामारी में कई परिवारों ने जिंदगी भर न भूलने वाला गम दिया है। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनों को खोया है। कई परिवार के बच्चों की परवरिश पर भी संकट आ गया है। छपरौली की रहने वाली 11 वर्षीय भविका जैन और आठ वर्षीय नमिका जैन को भी यह कोरोना जिंदगी भर का गम दे गया है। माता-पिता के बाद मां की जिम्मेदारी संभाल रही दादी भी कोरोना के कारण चल बसी। अब दोनों बेटियों की जिम्मेदारी दादा के कंधे पर आ गई है।
भविका और नमिका के पिता चिराग जैन कस्बे में ही पशु आहार की दुकान चलाते थे। उनका हंसता-खेलता परिवार था। पांच वर्ष पूर्व 28 वर्ष की आयु में चिराग की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इससे परिवार पर संकटों का पहाड़ टूट पड़ा। इसके बाद दोनों बच्चियों की मां भी घर छोड़कर चली गई। दोनों बच्चियों के भविष्य का जिम्मा अब दादी शैला जैन और दादा वीरेंद्र जैन के कंधों पर आ गया था। 29 अप्रैल को शैला जैन की भी मृत्यु हो गई। वह चार-पांच दिन से बुखार से पीड़ित थी। जांच में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। दादी की मौत के बाद दादा वीरेंद्र जैन अब दोनों बच्चियों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित रहते हैं।
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उनका कहना है कि मेरी उम्र 65 वर्ष हो चुकी है। पता नहीं अब मेरी कितनी जिंदगी बची है। मेरे बाद इन दोनों बच्चियों का क्या होगा, यह चिंता मुझे खाए जा रही है। अभी इनके सामने पूरी जिंदगी पड़ी है। भविका कक्षा-5 में और नमिका कक्षा-3 में पढ़ती है। मैं दुकान पर बैठूंगा तो घर में इनकी देखभाल कौन करेगा। इन हालातों में दोनों बच्चियों की पढ़ाई भी प्रभावित होने की संभावना है।
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