बागपत। जिला शहरी विकास अभिकरण (डूडा) में घपला होने का खुलासा होने के बाद रिकवरी शुरू हो गई है। विभाग की ओर से अभी तक 50 लाख रुपये से ज्यादा की रिकवरी हो चुकी है। लोगों के मरने के बाद भी खाते में किश्त पहुंची तो अब निकासी पर रोक लगवाई गई। साथ ही उस किश्त को वापस मंगवाया जा रहा है। इसके साथ ही किसी अपात्र को रुपये मिले तो उसकी भी रिकवरी कराई गई। ऐसे सभी मामलों में रिकवरी कराई जा रही है। उधर, इस तरह की गड़बड़ी पहले अधिकारियों व कर्मियों के समय में होने का दावा किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में पक्का मकान बनवाने के लिए डूडा में आवेदन करने पर सबसे पहले प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी खेल करके फाइल को आगे बढ़ा देते है। इसके बाद डूडा व नगर पालिका-पंचायतों के अधिकारियों को जांच करनी होती है और वह भी नियमों की धज्जियां उड़ाकर खेल करते हुए फाइलों को मंजूरी देते है। किसी सरकारी कर्मी को इस योजना का लाभ दे दिया गया तो किसी का नगर पालिका व पंचायत क्षेत्र से बाहर भी मकान बनवा दिया गया। जमींदारों तक को योजना का लाभ दिया गया और गरीबों को लाभ नहीं देकर परेशान किया गया। इस पूरे खेल का खुलासा होने के बाद जहां डीएम ने जांच शुरू कराई हुई है। अब रिकवरी भी शुरू हो गई है। डूडा के अधिकारी अब दावा कर रहे है कि किसी को गलत तरीके से योजना का लाभ दिया गया है तो वह पुराने अधिकारियों के समय में दिया गया है। उन सभी की जांच कराकर रिकवरी कराई जा रही है। अभी तक करीब 50 लाख रुपये की रिकवरी हो चुकी है। इस तरह के सभी मामलों को तलाश भी किया जा रहा है, जिससे उनकी रिकवरी कराई जा सके।
एक साल पहले मरने वालों के खातों में पहुंच रही किश्त
डूडा से मकान बनवाने के लिए किसी ने आवेदन कर दिया और उसकी एक साल पहले मौत हो चुकी है तो उसके बाद भी उनके खातों में किश्त पहुंच रही है। इस तरह ही अमीनगर सराय के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बावजूद एक साल बाद भी उनके खाते में किश्त पहुंच गई। इसका खुलासा होते ही खाते से रुपये निकालने पर रोक लगाई गई और उस किश्त को वापस कराया जा रहा है। इस तरह से एक-एक साल पहले मरने वालों के खातों में रुपये पहुंच रहे है।
किसी को गलत तरीके से योजना का लाभ मिला है तो मेरे समय से पहले मिला है। उनसे रिकवरी कराई गई है। इसके अलावा कोई रुपये लेने के बाद भी मकान नहीं बनवा रहा था और किसी में रुपये जाने के बाद विवाद हो गया है तो उनसे रिकवरी कराई जा रही है। - रजनी पुंडीर, परियोजना अधिकारी डूडा।