29 वर्षों से उत्तर प्रदेश की सत्ता से दूर कांग्रेस के मिशन-2017 में गरीब, मजदूर, किसान और मुसलमान के नए गठजोड़ के साथ मैदान में आने की तैयारी में है। यही कारण है कि छह किलोमीटर लंबी पदयात्रा, किसान संवाद और जनसभा के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इनसे जुड़े मुद्दों को उभारकर इनके बीच घुसपैठ की पूरी कोशिश की है।
गन्ना भुगतान, पापुलर के कम रेट, भूमि अधिग्रहण बिल पर संसद में कांग्रेस के तेवर बताकर किसानों को रिझाया। भाजपा और आरएसएस पर सधी भाषा में सांप्रदायिकता का आरोप लगाकर मुस्लिमों को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
बिहार में अप्रत्याशित सफलता से उत्साहित कांग्रेस का अगला मिशन यूपी है। उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ी भूमिका निभाने वाले किसान और मुसलमान किसी जमाने में कांग्रेस के वोट बैंक रहे हैं। मगर, सियासी करवट के साथ कांग्रेस का यह परंपरागत वोट खिसक गया।
ऐसे में कांग्रेस यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले इस बड़े वोट बैंक को रिझाने और उन्हें अपने पक्ष में करने की पुरजोर कोशिश में है। चुनाव से डेढ़ साल पहले ही कांग्रेस उपाध्यक्ष पैदल यात्रा कर किसानों के बीच पहुंचे। उनके दर्द को जान-समझकर उनके बीच पिछली कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों को बताया।
किसानों के हर मुद्दे पर केन्द्र सरकार को निशाने पर रखा। सूटबूट की सरकार बताकर पीएम नरेन्द्र मोदी को किसान और मजदूरों से दूर करने की कोशिश की। पश्चिमी यूपी के किसानों का सबसे बड़ा दर्द गन्ना भुगतान और उसके रेट पर चर्चा छेड़कर उन्हें कांग्रेस की पुरानी सरकार की याद दिलाई।
इससे अलग सिकरी खुर्द में मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और आरएसएस पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाकर किसानों के साथ मुसलमानों को रिझाने की पुरजोर कोशिश की। लोकसभा चुुनाव में यूपी में भाजपा की बड़ी जीत को झगड़े से पाई बताकर राहुल ने मुस्लिम मतों को साफ संदेश दे दिया है।
ऐसे में साफ है कि कांग्रेस हर हाल में अपने परंपरागत वोट को पाने को बेताब है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पदयात्रा के बाद उत्तर प्रदेश में सियासत तेज हो चुुकी है। ऐसे में साफ है कि दूसरे सियासी दल भी कांग्रेस के सियासी दांव के बाद असमंजस में हैं। देखना है कि अब कांग्रेस अपनी रणनीति को किस तरह धार देती है।