पश्चिम यूपी के किसानों को जगाने निकले पंजाब के आंदोलनकारी
कृषि कानूनों के विरोध में गांव गांव घूमकर किसानों को बताए जा रहे नुकसान
सिंघु बॉर्डर और यूपी गेट के लिए मांगी जा रही अधिक से अधिक मदद
बागपत। नये तीनों कृषि कानूनों पर लंबे खिंचते आंदोलन के बीच अब नये सिरे से संघर्ष की तैयारी तेज हो गई है। पंजाब के किसान सिंघु बॉर्डर और यूपी गेट के आसपास के जिलों के किसानों के बीच पहुंचने शुरू हो गए हैं। किसानों को कृषि कानून के नुकसान बताकर आंदोलन में सहयोग मांगा जा रहा है। आंदोलन को तेज करने के लिए युवा किसानों की टीमें गठित की गई हैं, जो पश्चिम यूपी में पहुंच रही हैं।
मंगलवार को पंजाब के जिला मोगा निवासी किसान अमनदीप सिंह, जसविंदर सिंह, बलजिंदर सिंह और प्रकट सिंह ने जिले का दौरा किया। रमाला क्षेत्र के गांव सूप, सोंटी, किशनपुर बिराल में किसानों के बीच पहुंचे और नये तीनों कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान की जानकारी दी। नुक्कड़ सभाएं कीं। बलजिंदर सिंह ने बताया कि किसानों को जागरूक करने के नजरिए से सिंघु बॉर्डर और यूपी गेट के आसपास के जिलों में जा रहे हैं। बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में पंजाब के युवा किसानों की टीमें जा रही हैं। उनका मकसद सिर्फ लोगों को जागरूक करना है। सोनीपत, पानीपत में भी किसानों को जागरूक किया है।
इनसेट
सिंघु बॉर्डर पर तेज हो सकता है आंदोलन
बागपत। सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन को तेज किया जा सकता है। धरनास्थल के सबसे नजदीक हरियाणा और पश्चिमी यूपी के जिले हैं। ऐसे में यहां के किसानों को जागरूक किया जा रहा है। आंदोलन में सहयोग भी मांगा जा रहा है।
वर्जन :
भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह ने कहा कि सिंघु बॉर्डर के किसानों की पूरी मदद की जाएगी। किसान एकता के साथ संघर्ष करेंगे।
देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि वह तो पहले ही सिंघु बॉर्डर के धरने को समर्थन कर चुके हैं। जिले के लोग धरने पर मदद के लिए जरूर जाएंगे।