बागपत जनपद के बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के गांव में पांच साल पहले बेटे की बहू से दुष्कर्म करने के आरोपी ससुर को अदालत ने दस साल कैद और 17 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम एडीजे मिताली गोविंद राव ने फैसला सुनाया।
एडीजीसी सुभाष तोमर ने बताया छह दिसंबर 2015 को बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के गांव में पीड़ित के साथ उससे ससुर ने दुष्कर्म किया था। आठ दिसंबर को पीड़ित ने ससुर पर दुष्कर्म और शौहर, सास, ननद और एक अन्य रिश्तेदार पर प्रकरण को दबाने और धमकी देने का मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। प्रकरण की सुनवाई एफटीसी प्रथम एडीजे मिताली गोविंद राव की कोर्ट में हुई। मंगलवार को अदालत ने पीड़ित के ससुर को दोषी मानते हुए दस साल कैद और 17 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। जुर्माने की राशि से दस हजार रुपये पीड़ित को दिए जाएंगे।
अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में शौहर, ननद और एक रिश्तेदार को दोषमुक्त करार दिया। पीड़ित की सास का इंतकाल हो चुका है। आरोपी ससुर जमानत पर था। फैसला आते ही पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेजा।
मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान लगे कैंप में हुआ था निकाह
पीड़ित बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के गांव की रहने वाली है। मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान साल 2013 में बरनावा में लगाए शिविर में भी रही थी। यहीं पर उसका निकाह हुआ था। पांच साल से वह मायके में ही रह रही है।