बागपत में एक दिसंबर को रज्जो की बेटी की शादी है। सोचा था बड़ी धूमधाम से बेटी की डोली रवाना होगी, परंतु मौजूदा हालात में ऐसा संभव नहीं। पूरा परिवार परेशान है कि पैसों का बंदोबस्त कैसे हो। ये कहानी अकेली रज्जो की नहीं है। बागपत जिले में दर्जनों परिवारों के सामने इस समय बडे़ नोटों पर प्रतिबंध के बाद बेटी की शादी को लेेकर समस्या पैदा हो गई। शायद, सरकार के नये आदेश से ऐसे लोगों को थोड़ी राहत मिल जाए।
देशभर में नोट बंदी के बाद पैदा हुए हालात में जनपद के कई परिवार पिस रहे हैं। जिन्हें अपनी बेटी या बेटे की शादी करने के लिए एक-एक पैसा एकत्र करने में भी परेशानी हो रही है। ऐसा ही एक परिवार बोहला गांव का है। बोहला गांव की विधवा रज्जो के पति अशोक की कुछ साल पहले बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। अब रज्जो पर ही पूरे परिवार का पालन-पोषण का जिम्मा है। रज्जो को दो बेटे अंकित और सुमित और एक बेटी संगीता है। रज्जो मजदूरी कर बच्चों को शिक्षा दिला रही है। अब रज्जो की बेटी संगीता की शादी एक दिसंबर की है। रज्जो ने बताया उसकी बेटी संगीता का रिश्ता हो चुका है। ससुरालियों की कोई मांग नहीं है, परंतु हम अपनी हैसियत के हिसाब से बेटी को सब कुछ देकर खुशी-खुशी विदा करना चाहते हैं। हमारा यह सपना तब टूटा जब बडे़ नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया। शादी में खर्च तो होना ही है, कहां से लाएं पैसा।
दूसरा मामला फतेहपुर पुट्ठी गांव की विधवा कमलेश का है। कमलेश के पति सोराज की बीमारी के चलते कुछ साल पहले मौत हो चुकी है। कमलेश के पास तीन बेटी और दो बेटे हैं। कमलेश ने बताया 10 दिसंबर को बेटी किरण की शादी होनी थी, लोगों से पैसे उधार मांगने की कोशिश भी की, लेकिन हर समय सभी के सामने ये ही समस्या है। पैसों के अभाव में शादी स्थगित करनी पड़ी।
बावली गांव की ममता भी विधवा है। उसका भी हाल इन दोनों जैसा है। ममता की बेटी पूनम की शादी आठ दिसंबर की है, फिलहाल ममता एक-एक पैसे के लिए बैंक के चक्कर काट रही है। यह तो सिर्फ तीन मामले हैं, जनपद में ऐसे दर्जनों परिवार हैं, जिनके सामने अपनी लाडली बेटी की शादी करने का संकट खड़ा हो गया है।