सात साल बाद गांगनौली लौटा प्रवेश राठी का परिवार
2013 में माता-पिता की कर दी थी हत्या, एक लाख के इनामी रहे प्रमोद गांगनौली पर था आरोप
आईजी प्रवीण कुमार से मिला था फौजी प्रवेश राठी, पुलिस सुरक्षा के बीच लौटा गांव
अमर उजाला ब्यूरो
दोघट (बागपत)। गांगनौली गांव की पुरानी रंजिश में सात साल पहले मां-बाप की हत्या के बाद गांव छोड़ चुका फौजी प्रवेश राठी का परिवार लौट आया है। आईजी प्रवीण कुमार से मिलकर प्रवेश राठी के परिवार ने गांव में रहने की इच्छा जताई थी। पुलिस सुरक्षा के बीच परिवार के लोग गांव पहुंचे और अपने घर का ताला खोला।
क्षेत्र के गांगनौली गांव में 13 नवंबर 2013 को दंपती रामवीर और सरोज की पुलिस सुरक्षा के बीच हत्या कर दी गई थी। दोनों अपने बेटे और भतीजे की हत्या में गवाह थे। रामवीर राठी के बेटे फौजी प्रवेश राठी ने परिवार के साथ गांव छोड़ दिया था। पिछले दिनों आईजी प्रवीण कुमार से मुलाकात कर फौजी ने वापस गांव में रहने की इच्छा जताई थी। इसके बाद एएसपी मनीष मिश्रा से मुलाकात की। एएसपी ने सीओ बड़ौत आलोक कुमार को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। रविवार को दोघट एसओ हेमेंद्र बालियान के साथ सुरक्षा घेरे में प्रवेश राठी का परिवार अपने घर पहुंचा और मकान का ताला खोलकर यहां रहना शुरू कर दिया। इस मामले की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी शिकायत की गई थी। आईजी मेरठ ने भी उन्हें आश्वासन दिया कि कोई उन्हें कुछ नहीं कह पाएगा।
इस तरह छिप-छिपकर रहा परिवार
राजस्थान के जयपुर में सेना में चालक पद पर नौकरी कर रहे फौजी प्रवेश राठी ने बताया कि वर्ष 2013 में उसकी माता सरोज और पिता रामबीर की खेत से लौटते समय एक लाख के इनामी रहे मृतक प्रमोद राठी ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिस सुरक्षा में हत्या कर दी थी। इससे पहले उसके भाई प्रवीण और तहेरे भाई संजीव और पप्पू की हत्या कर दी गई थी। इस दौरान परिवार छिपकर रिश्तेदारों के यहां रह रहा था।
नौ साल पुराना झगड़ा, गांगनौली में खूब बहा खून
झगड़े की शुरुआत सितंबर 2011 में हुई थी। बड़ौत से गायब हुए दोघट के जितेंद्र और नैनू का शव 14 सितंबर 2011 को प्रमोद गांगनौली के खेत में दबा मिला था। इस वारदात में सद्दाम और प्रमोद को नामजद किया गया था। दोनों आरोपियों को शक था कि रामवीर पक्ष के लोग उनकी हत्या करा सकते हैं। इसी को लेकर प्रमोद और रामवीर पक्ष के लोगों में फायरिंग भी हुई थी। इसके बाद हत्याओं का लंबा सिलसिला चला।
घर पर ताला और खेत हो गए बंजर
प्रवेश राठी के घर पर ताला लटका रहा। जमीन न तो वह खुद बुआई कर सका और न ही अन्य कोई किसान इस जमीन को बोने की हिम्मत जुटा पाया। खेती की जमीन भी बंजर हो गई थी। रविवार को पुलिस बल के साथ खेत की ट्रैक्टर चलवाकर जुताई भी कराई गई।
सीएम योगी से ही उम्मीद
फौजी प्रवेश राठी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बदौलत ही यह संभव हो गया है। यह सरकार न होती तो शायद उसका परिवार अभी यहां न आ पाता।
प्रमोद राठी मारा जा चुका, भाई जेल में
प्रमोद राठी की हत्या हो चुकी है। उसका भाई प्रवीण राठी पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ और वर्तमान में जेल में बंद है। प्रमोद की मां सुभाषना राठी ने पलायन की चेतावनी दी थी। पोस्टर भी चस्पा किए गए थे, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती की। प्रमोद राठी की जमीन और मकान की पैमाइश भी कराई गई।