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गन्ना छोड़कर उगाया था आलू, भाव मिला पांच रुपये

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गन्ना छोड़कर उगाया था आलू, भाव मिला पांच रुपये
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बागपत। गन्ने का भाव और भुगतान नहीं मिलने से दुखी होकर आलू की खेती करने वाले गौना गांव के किसानों को जोर का झटका लगा है। आलू की खोदाई शुरू हो चुकी है, लेकिन किसानों को भाव मिल रहा है, सिर्फ पांच रुपये प्रति किलो। गाजियाबाद की लाल बाग मंडी में आलू पहुंचा रहे किसानों को 50 किलो के बोरे के दाम सिर्फ 250 से तीन सौ रुपये दिए जा रहे हैं। लाखों रुपये की लागत लगाकर आलू पैदा करने वाले किसान हैरान और परेशान हैं। किसान वीरेंद्र यादव ने बताया कि मोदीनगर चीनी मिल को गन्ना सप्लाई करते थे। दो साल का भुगतान नहीं मिला। परेशान होकर इस बार आलू की बुआई की । अच्छी पैदावार हुई, लेकिन मंडी में सिर्फ पांच रुपये किलो का भाव मिल रहा है। लागत भी वसूल नहीं हुई है। आलू का तीस रुपये प्रति किलो का बीज लेकर बुआई की थी।
बाजार में 12 रुपये किलो में बिक रहा आलू
बागपत। बाजार में आलू का भाव 10 से 12 रुपये प्रति किलो है। आढ़ती जाहिद का कहना है कि 250 से तीन सौ में 50 किलो का आलू का बोरा मिल रहा है।
खेत पर मंदा और कोल्ड स्टोर में जाते ही महंगा
बागपत। किसान राहुल यादव, ओम दत्त यादव का कहना है कि आलू की खुदाई शुरू होते ही अब मंदी घोषित कर दी गई है। किसानों के साथ यह सीधी ठगी है। यही आलू कोल्ड स्टोर में रखा जाएगा और कुछ दिन बाद ही महंगा हो जाएगा। किसानों से आलू की खरीद के दाम तय किए जाने चाहिए।
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रटौल और लाल बाग मंडी में सप्लाई
बागपत। जिला उद्यान अधिकारी दिनेश अरुण का कहना है कि जिले के किसान अधिकतर रटौल की निजी मंडी और गाजियाबाद की लाल बाग मंडी में सप्लाई करते हैं। इस बार फसल की अच्छी पैदावार है।
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250 हेक्टेयर में आलू की फसल, बंपर पैदावार
बागपत। जिले में करीब 250 हेक्टेयर में आलू की फसल उगाई गई है। इस बार आलू की बंपर पैदावार हुई है। इस कारण किसानों को भाव नहीं मिल रहा है।
किसने क्या कहा
बसपा जिलाध्यक्ष मोहित आनंद का कहना है कि किसानों से आलू खरीद का लाभकारी मूल्य तय होना चाहिए। किसान और मजदूरों को लागत भी वसूल नहीं हो रही है।
भाकियू की युवा इकाई के जिलाध्यक्ष हिम्मत सिंह का कहना है कि गन्ना हो या आलू किसान बेहद परेशान हैं और सरकार सुनवाई नहीं कर रही है।
युवा रालोद के जिलाध्यक्ष प्रमेंद्र तोमर का कहना है कि गन्ना किसानों को भुगतान नहीं मिल रहा है। खेत से आलू की खुदाई शुरू होते ही दाम गिरा दिए जाते हैं, जबकि कोल्ड स्टोर के आलू के दाम आसमान छूने लगते हैं। सरकार फेल हो गई है।
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