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परिवारों को एक सूत्र में पिरो रही पुलिस

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परिवार परामर्श केंद्र के जरिए छह महीने में 450 में से 300 मामलों में हो चुकी सुलह
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। यूं तो जोड़ी ऊपर वाला बनाकर भेजता है। यहां नामसमझी के चलते ये टूटने के कगार पर पहुंच जाते हैं। पुलिस के प्रयास से काफी रिश्तों में फिर से जान पड़ गई है। इससे कई परिवार टूटने से बच गए। पुलिस आंकड़ों के अनुसार छह माह के दौरान दहेज उत्पीड़न के 450 में से 300 मामलों में सुलह हो चुकी है। शेष मामलों में भी पुलिस परिवार को एक सूत्र में पिराने की कोशिश में जुटी है।
केस एक
बावली गांव निवासी मोनिका व आर्यन की हंसती खेलती गृहस्थी बिखरने के कगार पर थी। दरअसल दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाकर मोनिका ने ससुराल वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी थी। हालांकि वह अपने पति के बिना नहीं रहना चाहती थी। मामला पहले परामर्श केंद्र चौकी प्रभारी रूबी उपाध्याय के पास पहुंचा। इसके बाद महिला थाना बागपत प्रभारी साक्षी सिंह के पास गया। यहां दोनों पक्षों में सुलहनामा कराकर उन्हें घर भेज दिया।
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केस दो
सरूरपुर गांव निवासी पूजा की शादी करीब दो साल पहले शामली के पंकज (दोनों नाम परिवर्तित) से हुई थी। कुछ दिन बाद ही पति-पत्नी में विवाद रहने लगा। पूजा ने पति समेत ससुराल वालों के खिलाफ दहेज की शिकायत एसपी अभिषेक कुमार से की थी। एसपी ने मामला महिला थाना बागपत की प्रभारी साक्षी सिंह के पास भेज दिया। वहां मुलाकात होने पर गिले शिकवे दूर हो गए। महिला थाना प्रभारी साक्षी सिंह ने बताया कि पूजा की सास से नहीं बनती थी। पति भी उसका साथ नहीं देता था। इससे गुस्से में आकर पूजा ने पति को थप्पड़ मार दिया था। अब पुलिस ने नवदंपती को फिर एक करा दिया है।
300 मामलों में हो चुकी सुलह
महिला थाना पुलिस प्रभारी साक्षी सिंह के मुताबिक जनवरी से लेकर अब तक जनपद में 450 दंपती ने दहेज उत्पीड़न की शिकायतें आईं। इनमें दोनों पक्ष के लोगों को परामर्श के लिए बुलाया। अब तक 450 में से तकरीबन 300 दंपती ने सहमति के आधार पर सुलह कर ली। महिलाओं ने दहेज को बुनियाद बताकर शिकायत की थी। परामर्श के दौरान मामले झूठे निकले। ज्यादातर को सास एवं ननद से शिकायत थी।
सराहनीय पहल की
दो-तीन माह से अचानक बढ़ी शिकायतों के कारण मामले लंबित होने लगे थे। प्रत्येक शुक्रवार व शनिवार को परामर्श केंद्र पर शिकायत सुनने का दिन तय है। जिससे बिखरते परिवार को एक जगह जोड़ा जा सके।
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इनका कहना है
परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसिलिंग की जाती है। इसके बाद भी सुलह नहीं होने पर प्रकरण कोर्ट भेज दिया जाता है। फिलहाल जिले में काउंसिलिंग का सुखद परिणाम आ रहा है। इसी वर्ष 60 फीसदी से ज्यादा दंपती गिले शिकवे भुलाकर फिर से एक हो चुके हैं। बाकी मामलों में प्रयास जारी हैं।-आलोक कुमार, सीओ बड़ौत
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