बड़ौत (बागपत)। खेल की दुनिया में देश और दुनिया तक धाक जमाने वाले खिलाड़ियों के गांव मलकपुर में अब लोग रिश्ता करने से भी कतराने लगे है। बेटियां व बेटे जवान हो चुके है, लेकिन कोई रिश्ता लेकर जाना पसंद तक नहीं करता। जो रिश्ते तय हुए थे, वे टूटने की कगार पर है। क्योंकि गांव में लोग जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण जलभराव की विकराल समस्या से जूझ रहे है। गली में दो से तीन फीट गंदा पानी भरा होने के कारण लोगों को छतों से होकर गुजरना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि गंदगी के कारण गांव में बीमारी से कई लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों बीमार पड़े है। इसके बावजूद न तो ग्राम प्रधान इस ओर ध्यान दे रहे है और न ही जनप्रतिनिधि।
इनसे है मलकपुर की पहचान
अर्जुन अवार्डी सुभाष पहलवान, शौकेंद्र पहलवान, राजीव तोमर, अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी नितिन तोमर, अंतरराष्ट्रीय पहलवान संदीप तोमर के अलावा यश भारती, भारत केसरी व लक्ष्मीबाई अवार्डी महिला मल्ल अंशु तोमर के नाम से मलकपुर की पहचान है। इसके अलावा देश और प्रदेश स्तर पर यहां के कई खिलाड़ी नित नए मुकाम हासिल कर रहे है।
जलभराव से परेशान है 100 परिवार
गांव की मोना पट्टी में जल भराव से एक नहीं दो नहीं बल्कि 100 घरों के लोग परेशान है। ग्रामीण बलजोर, प्रकाश, सूरजे, धर्मवीर, मंशी, दरियाव, चंद्र, धर्मवीर, कृष्ण, विजयपाल का कहना है कि अब तो रिश्तेदारों ने भी गांव मेें आना बंद कर दिया है। त्योहारों पर महिलाओं की कोथलियां भी आनी बंद हो गई है। बेटियां व बेटे जवान है, लेकिन कोई रिश्ता लेकर नहीं आता। करीब दस महीने पहले विपिन पुत्र ओमकार की शादी हुई थी, उस दौरान जल भराव की समस्या कम थी। मगर, अब गली में दो से तीन फीट गंदा पानी हर समय भरा रहता है।
छत के लिए नहीं, गलियां पार करने के लिए लकड़ी की सीढ़ियाें का प्रयोग
गलियां गंदे पानी और कीचड़ से हमेशा भरी रहती है। हालात ऐसे है कि दूसरी गलियों में जाने के लिए सड़काें पर लकड़ी की सीढ़ियां, फट्टे आदि डालकर पार करना पड़ता है। ग्रामीण अरविंद, विक्की, भोपाल का कहना है कि स्कूली बच्चे, महिलाओं व बेटियों को या तो गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है या फिर एक-दूसरे के मकानों की छतों से। गली में आमने-सामने बने मकानों मेें आने के लिए लोगों को गली में सीढ़ियां डालकर जाना पड़ता है।
बीमारी ढेर, चिकित्सक भी मुंह रहे फेर
जलभराव से गांव मेें संक्रामक बीमारी फैल चुकी है। कई बीमार है तो कई असमय काल के गाल में समा चुके है। ग्रामीण विजयपाल और बलजोर ने बताया कि प्रीति, कुसुम, सुमन, मूर्ति, रवीन, शर्मिष्ठा आदि बीमार पड़ेे है, जबकि टीकाराम, सूरजमल, चरण सिंह व रामबीर की बीमारी से मौत हो चुकी है। हालात ऐसे है कि कोरोना काल में भी स्वास्थ्य विभाग व पशु पालन विभाग की टीम गांव में नहीं पहुंची। जिस कारण न तो लोगों को कोरोनारोधी वैक्सीन लगी है और न ही पशुओं को खुरपका-मुंहपका के टीके। इस संबंध में सीएचसी डा विजय कुमार का कहना है कि घर-घर टीकाकरण चल रहा है, फिर भी स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव भेजी जाएगी।
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तालाब से हटे कब्जा तो मिले स्थायी समाधान
जलभराव की समस्या का कारण गांव के तालाब पर अवैध कब्जा है। पूर्व में मोना पट्टी के घरों का सारा गंदगी तालाब में जाता था। वर्तमान में तालाब पर कब्जा हो गया। ऐसे में पानी निकासी तालाब में न होकर गलियों में भरना शुरू हो गया है। ऐसा नहीं है कि मोना पट्टी की जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हो सकता। मगर, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ग्रामीणों को अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी होगी।
पूर्व प्रधान कृष्णपाल और पूर्व ग्राम सचिव रोहित तोमर बताते है कि पांच साल के कार्यकाल में तकरीबन डेढ़ लाख रुपये खर्च जलनिकासी मेें किए थे। गली मेें पानी निकालने के लिए पंप सेंट खरीदा गया था, लेकिन अब फिर हालात ऐसे ही हो गए है। वर्तमान में यह पंप सेट झाड़ियों मेें पड़ा है और धूल फांक रहा है।
वर्तमान प्रधान रणबीर का कहना है कि गांव मेें स्थित तालाब पर अवैध कब्जा है। जलनिकासी के लिए नाले का निर्माण होना है। मगर, कुछ लोग नाले का निर्माण नहीं होने दे रहे है। इससे जल भराव की समस्या बनी हुई है। बताया कि अभी तक 50 हजार रुपये पानी निकासी के लिए खर्च किया जा चुका है। बताया कि एसडीएम, डीएम से लेकर कमिश्नर तक शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
गांव का तालाब आबादी के बीच आ गया है, जिस कारण जल निकासी का कोई रास्ता नहीं है। राजस्व अभिलेखों में तालाब से जल निकासी के लिए एक नाला दर्ज है, उस पर भी अवैध कब्जा कर रखा है। जब तक नाले व तालाब पर हुए अवैध कब्जे को नहीं हटाया जाएगा, तब तक जल भराव की समस्या का कोई समाधान नहीं हो सकेगा। इस संबंध में कई बार लिखित व मौखिक तहसील अधिकारियों व जिला प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। - सुधीर तोमर, एडीओ पंचायत।
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मेहमानों को गांव बुलाने में आने लगी शर्म
अर्जुन अवार्डी शौकेंद्र पहलवान का कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है। कई बार अधिकारियों से शिकायत कर चुके है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकाला जा रहा है। अब तो हमें भी गांव की हालत देखकर अपने मेहमानों को गांव में बुलाने में शर्म आने लगी है। एशियन चैंपियन सुभाष पहलवान का कहना है कि तालाब पर अवैध कब्जा है। जिसका खामियाजा पूरा गांव भुगत रहा है। लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी नितिन तोमर व यश भारती अंशु तोमर का कहना है कि पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण गांव में जगह-जगह जल भराव की समस्या बनी हुई है। इस गांव के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पटल पर खेलों मेें देश-दुनिया तक नाम रोशन किया है, लेकिन गांव की बदहाली पर हम भी शर्मिंदा है। कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
बड़ौत के मलकपुर गांव में दूषित पानी से भरी गली से छोटे बच्चें का स्कूल छोड़ने जाती बुजुर्ग महिला।- फोटो : BARAUT
बड़ौत के मलकपुर गांव में दूषित पानी से भरी गली से होकर स्कूल जाते छात्र व छात्राएं।- फोटो : BARAUT