पौधे लगाए लाखों, देखभाल के अभाव में सूख गए
बागपत। प्रत्येक वर्ष बरसात का मौसम शुरू होने से पहले जुलाई माह में पौधरोपण किया जाता है। सरकारी विभागों की ओर से पौधे लगाए जाते हैं। इसके बावजूद जिले में अपेक्षित हरियाली नहीं फैल सकी है। रख-रखाव और देखभाल न होने के कारण प्रतिवर्ष हजारों पौधे सूख जाते हैं।
पिछले साल 9 अगस्त 2019 को जिले में नौ लाख सात हजार पौधे लगाए गए थे। इस बार जिले में पांच जुलाई को एक साथ आठ लाख पौधे रोपे जाने का लक्ष्य है। जिले में वन विभाग की इदरीशपुर, दत्तनगर, सरौरा, अलावलपुर, डौला, मुबारिकपुर व डौला में पौध तैयार की गई है। वन विभाग की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। नर्सरी से पौधों को ट्रैक्टरों में भरवाकर भिजवाया जा रहा है। 26 विभागों को पौधा रोपण की जिम्मेदारी दी गई है।
केस-1
पौधा गायब, लोगों ने बनाया थूकदान
नगर के सिसाना रोड पर सीएचसी के समीप लगाया गया पौधा गायब है। लोगों ने पौधे के स्थान को थूकदान बना दिया है। पौधा कैसे सूखा और कहां गायब हो गया, इस ओर किसी का कोई ध्यान नहीं है।
केस दो -
बिना रख-रखाव के सूख गया पौधा
जिला अस्पताल में बिना रख-रखाव के पौधा सूख गया है। समय पर पानी न मिलने और देखभाल न होने के कारण यह सूखी डाली में तब्दील हो गया है। यहां भी पिछले साल ही पौधरोपण किया गया था।
केस तीन -
पुलिस लाइन में सफाई और समय पर पानी व खाद के अभाव में पौधा सूख गया है। पिछले साल बड़े स्तर पर यहां भी पौधरोपण हुआ था। लेकिन इसका फायदा होता नहीं दिख रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
बागपत रेंज के वन अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि पौधारोपण के उपरांत अंतरप्रभागीय टीम द्वारा पौधों का धरातल पर निरीक्षण किया जाता है। जिला स्तर से लेकर मंडल स्तर की टीमें निरीक्षण करती हैं। कोशिश यह होनी चाहिए कि अगर पौधा सूख गया है तो उसकी जगह तुरंत दूसरा लगाया जाना चाहिए। सबको जिम्मेदारी निभानी होगी। वहीं प्रभारी वन अधिकारी संजीव कुमार का कहना है कि जो भी विभाग पौधरोपण करता है, देखरेख की जिम्मेदारी उसी की होती है। वन विभाग की ओर से समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है।