कोरोना की पहली लहर ने पिता को छीन लिया, परिवार गम से उबरा भी नहीं था कोरोना की दूसरी लहर में मां भी साथ छोड़ गई। तीन छोटे बच्चों की जिम्मेदारी बुढ़ापे में दादा को निभानी पड़ रही है।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने ऐसी तबाही मचाई कि इससे उबर पाना चुनौती भरा होगा। खासतौर पर उन बच्चों के नाजुक मन से इस महामारी की कड़वी यादें शायद ही कभी विस्मृत हों, जिनके माता-पिता काल के गाल में समा गए।
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उत्तर प्रदेश के बड़ौत में बिजरौल गांव में ऐसा ही एक परिवार है। जहां तीन मासूमों की जिम्मेदारी बूढ़े दादा-दादी पर आ गई है। कोरोना की पहली लहर ने गांव निवासी 34 वर्षीय आबिद पुत्र सुलेमान को परिवार से छीन लिया। परिवार अभी संभला नहीं था कि दूसरी लहर में बीती 19 अप्रैल को आबिद की पत्नी मेहरूनिशां की भी मौत हो गई।
बूढ़े सुलेमान ने बताया कि आबिद के दो पुत्र समद (12), अजीम (7) व एक पुत्री इंसा (5) हैं। बताया कि समद कक्षा सात, अजीम कक्षा चार व इंसा यूकेजी में है। सुलेमान ने बताया कि बच्चों के भरण-पोषण व पढ़ार्ई का संकट खड़ा हो गया है।
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मदद दिलाने में जुटे
बिजरौल गांव की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला रेखा परिवार को आर्थिक मदद दिलाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं। उनका कहना है कि जब भी इन मासूमों को देखती हैं तो आंखें भर आती हैं। वहीं, रेखा से प्रेरणा लेकर गांव का ही एक बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र इंतजार भी परिवार को मदद दिलाने के लिए प्रयासरत है।