- मौलानाओं ने पुरानी होने पर पढ़ने लायक नहीं रहने वाली कुरानों को कूड़े में नहीं डालने की अपील की
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संवाद न्यूज एजेंसी।
बड़ौत। शहर में रमजान के महीने में नई पहल शुरू की गई है। यहां शनिवार को शहर इमाम मुफ्ती खालिद कासमी की देखरेख में 42 मस्जिदों से फटी व पुरानी 200 से अधिक कुरान शरीफ को एकत्र कर कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। सभी ने खिदमत सोसायटी की इस पहल को अच्छा बताते हुए पुरानी होने पर पढ़ने लायक नहीं रहने वाली कुरानों को कचरे में नहीं डालने की अपील की ताकि धार्मिक भावना को ठेस न पहुंचे।
शहर इमाम मुफ्ती खालिद कासमी ने कहा कि कुरान शरीफ अल्लाह का कलाम है। इसलिए इसकी हर हाल में इज्जत और हिफाजत करना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब कुरान पढ़ने के काबिल न रहें, पेज फट जाएं या हालत ऐसी हो जाए कि उनकी बेअदबी का खतरा हो तो उन्हें इस्लामिक तरीके से सुपुर्द-ए-खाक किया जाना चाहिए। कहा कि इसे साफ कपड़े में लपेटकर ऐसी जगह सुपुर्द-ए-खाक किया जाए, जहां उसके ऊपर कोई न गुजरे।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पुरानी कुरान को इधर-उधर न फेंके और न ही कूड़े में डालें, बल्कि सम्मानजनक तरीके से सुपुर्द-ए-खाक करें। मौलाना आरिफ-उल-हक ने कहा कि कुरान एक बहुत पवित्र ग्रंथ है, जिसकी सभी को हिफाजत करनी चाहिए। इसे पुरानी होने पर या फट जाने पर किसी रद्दी वालों को भी नहीं देकर कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक करना अच्छा है। जिससे समाज के लोगाों को एक जागरूकता मिलेगी।
वहीं मुफ्ती फुरकान ने कहा कि जर्जर कुरानों को सुपुर्द-ए-खाक करने से धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा और आने वाली पीढि़यों को भी यह एक संदेश मिलेगा। इसलिए ही इनको शनिवार को कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान खिदमत सोसायटी के अध्यक्ष आजाद चौधरी, एडवोकेट आकिब चौधरी, आरिफ चौधरी, डॉ़ शालीन चौधरी, शाकिब, शादाब, नाजिम आदि मौजूद रहे।