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भूमि की निशानदेही करने पहुंची हरियाणा की टीम का विरोध

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बागपत। यूपी के नंगला बहलोलपुर गांव के किसानों की शिकायत पर हरियाणा राज्य की सीमा में खुर्मपुर गांव में शुक्रवार को सोनीपत जिले की राजस्व विभाग की टीम निशानदेही करने पहुंची। खुर्रमपुर के किसानों ने हंगामा करते हुए उन्हें रोक दिया। आरोप है कि किसान झगड़ा करने पर उतारू हो गए। किसानों के तेवर देखते हुए अधिकारियों को बैरंग लौटना पड़ा। इस मामले को लेकर दोनों राज्यों के किसानों के बीच तनाव व्याप्त है।
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बता दें कि हरियाणा के खुर्मपुर में यूपी के नंगला बहलोलपुर गांव के किसानों की फसल है। आरोप है कि 18 जुलाई की रात खुर्मपुर के किसानों ने नंगला बहलोलपुर गांव के किसानों की फसल ट्रैक्टर से जोत दी थी। इससे एक बार फिर दोनों राज्यों के किसानों के बीच तनाव की स्थिति बन गई है। इसकी शिकायत किसानों ने सोनीपत के डीसी और एसपी से की थी। इस पर बृहस्पतिवार को सोनीपत के सीटीएम जितेंद्र जोशी के नेतृत्व में तहसीलदार, पटवारी आदि अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि शुक्रवार को आकर निशानदेही का काम शुरू करेंगे। शुक्रवार को टीम निशानदेही के लिए पहुंची तो खुर्मपुर के किसान एकत्र हो गए। इनमें महिला भी शामिल थी। उन्होंने निशानदेही का विरोध करते हुए हंगामा किया। हंगामा बढ़ता देख सोनीपत के राजस्व विभाग की टीम बिना निशानदेही किए ही उच्चाधिकारियों को इसकी रिपोर्ट देने की बात कहकर लौट गई। नंगला बहलोलपुर के किसानों का कहना है कि वह एक बार फिर इस मामले में सोनीपत के अधिकारियों से शिकायत करेंगे।
चाहे पूरा गांव मर जाए, एकतरफा कार्रवाई नहीं होने देंगे
हंगामे के दौरान एक व्यक्ति ने धमकी भरे लहजे में एलान किया कि चाहे पूरा गांव मर जाए, एकतरफा कार्रवाई नहीं होने देंगे। महिलाओं ने भी चेताया कि एकपक्षीय कार्रवाई न की जाएं।
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पांच दशक बाद भी नहीं हो पाया विवाद का पटाक्षेप
बागपत। यमुना खादर से सटे हरियाणा और यूपी के गांवों में करीब पांच दशक से जमीन के लिए विवाद चला आ रहा है। सोनीपत के जाजल व खुर्मपुर और बागपत के निवाड़ा व नंगला बहलोलपुर के किसान कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। चारों गांवों में करीब 450 एकड़ जमीन के लिए हर साल खूनी संघर्ष होता है। हरियाणा-यूपी सीमा के गांवों के किसान लंबे समय से जमीन के सीमांकन के लिए आपस में भिड़ते रहते हैं। 1974 में केंद्र सरकार ने विवाद सुलझाने के लिए केंद्रीय सिंचाई मंत्री उमा शंकर दीक्षित की अध्यक्षता में यूपी और हरियाणा के यमुना खादर की सीमा का विवाद निपटाने के लिए एक समिति का गठन किया था। इसे दीक्षित अवॉर्ड का नाम दिया गया। उस समय तय हुआ था कि यूपी के किसानों की जमीन हरियाणा की ओर है तो उस पर हरियाणा के किसान काबिज होंगे और हरियाणा के किसानों की जमीन यूपी की ओर है तो उस पर यूपी के किसान काबिज होंगे। उस पर कब्जा दिलवाने की कार्रवाई प्रशासन को करनी थी, लेकिन उस पर कब्जा नहीं दिलवाया गया। इस कारण हर साल खूनी संघर्ष होता है। हरियाणा-यूपी सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कई बार अधिकारियों की बैठक हो चुकी है, लेकिन विवाद खत्म नहीं हो रहा है।
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