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क्रोध छोड़कर मन को शांत रखना चाहिए : विनिश्चय सागर

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-अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुई धर्मसभा, बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे माैजूद
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फोटो संख्या 3
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार को धर्म सभा हुई, जिसमें जैन संत विनिश्चय सागर ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने इंसान को क्रोध छोड़कर मन को शांत रखने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।
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संत विनिश्चय सागर ने कहा कि आज गृहस्थ जीवन में प्रेम की जगह कलह ने अपना स्थान बना लिया है। उन्होंने बताया कि इंसान के अंदर का अहंकार और आकांक्षा ही क्रोध के रूप में प्रकट होते हैं। इसी से गृहस्थ जीवन में कलह का जन्म होता है। संत ने क्रोध को एक धधकता अंगारा बताया। उन्होंने कहा कि क्रोध की प्रचंड ज्वाला में सारे धर्म स्वाहा हो जाते हैं। हमें अपने जीवन में क्रोध का त्याग कर शांति धारण करनी चाहिए। संत विनिश्चय सागर ने कहा कि क्रोध के अंगारे को बुझाने के लिए क्षमा का नीर आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि क्रोध को क्रोध से कभी समाप्त नहीं किया जा सकता। इससे तो केवल शत्रुता ही बढ़ती है। इस मौके पर श्रेयांस जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, नवीन जैन, वरदान जैन, महेंद्र जैन, अंकुर जैन आदि उपस्थित रहे।
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