आत्मा की पाकिजगी का मौका देता है रमजान
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। वंदे को हर बुराई से दूर रखकर अल्लाह के नजदीक लाने का मौका देने वाले पाक महीने रमजान की रूहानी चमक से दुनिया एक बार फिर आज से रोशन हो चुकी है। फिजा में घुलती अजान और दुआओं में उठते लाखों हाथ खुदा से मोहब्बत के जज्बे को शिद्दत दे रहे हैं।
फूंसवाली मस्जिद के शाही इमाम आरिफ उल हक बताते हैं कि इस माह में रोजेदार अल्लाह के करीब आने की कोशिश के लिए भूख-प्यास समेत तमाम इच्छाओं को रोकता है। बदले में अल्लाह अपने उस इबादत गुजार रोजेदार बंदे के बेहद करीब आकर उसे अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है।
इस्लाम की पांच बुनियादें हैं,
-कलमा पढ़ना,
-नमाज (पूजा) पढ़ना
-जकात(टेक्स) देना
-रमजान (व्रत) के रोजे रखना
-हज ( तीर्थ) करना
रमजान की विशेषताएं
रमजान की तमाम विशेषताएं हैं। कहा गया है कि इंसान के अंदर जिस्म और रूह है। आम दिनों में उसका पूरा ध्यान खाना-पीना और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है। वहीं, रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना बढ़ जाता है। साथ ही इस महीने में दोजख (नरक) के दरवाजे भी बंद कर दिए जाते हैं और शैतान को कैद कर दिया जाता है।
माह ए रमजान में तीन अशरे होते हैं
अमूमन 30 दिन के रमजान माह को तीन अशरो (खंडो) में बांटा गया है। पहला अशरा- रहमत का है इसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत की दौलत लुटाता है। दूसरा अशरा-बरकत का है। जिसमें खुदा बरकत नाजिल करता है। जबकि तीसरा अशरा- मगफिरत का है। इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों को गुनाह से पाक कर देता है।