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भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता- गुप्ति सागर

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बड़ौत (बागपत)। गुप्ति सागर महाराज ने कहा कि पंच कल्याणक में भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य किसी-किसी को मिलता है।
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वे दिगंबर जैन अतिथि भवन में धर्मसभा में बोल रहें थे। धर्मसभा में पंच कल्याणक में भगवान के माता पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले कृष्णा जैन और अशोक जैन ने उपाध्याय के पावन चरणों में श्रीफल अर्पित किया। उपाध्याय महाराज ने कहा मां की ममता, धरती की क्षमता और साधु की समता का कोई ओर-छोर नहीं होता।
उन्होंने कहा पत्नी वह होती है जो आंख दिखाकर प्रेम करती है, मां वह होती है जो आंख बंद होने तक प्रेम करती है। युवक जब कभी तुम शादी के उद्देश्य से किसी लड़की को देखने जाओ तो उससे एक ही बात पूछना कि तुम्हारी अपनी मां से बनती है या नहीं। यदि वह कहती है हां तो ठीक है। यही बात युवतियों पर भी लागू होती है, वह भी पूछ सकती है लड़के से कि अपने पिता और बहन से बनती है कि नहीं। यदि हां तो ठीक है।
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उन्होंने कहा कि रिश्ता कभी मत तोड़ना चाहे माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी, गुरू-शिष्य किसी का भी रिश्ता हो। पहला रिश्ता कायम रहे तभी दूसरा रिश्ता जोड़ना। माता-पिता एवं परिजन का दिल दुखाकर या तोड़कर कभी नया रिश्ता नहीं जोड़ना। इतिहास में रामचंद्र जैसे बेटे हुए हैं, जिन्होंने अपने पिता के वचनों के लिए अयोध्या के राज्य का त्याग भी कर दिया था और वनवास स्वीकार किया। अंत में उपाध्याय श्री ने भगवान के माता पिता बने कृष्णा जैन श्री अशोक जैन को मंगल आशीर्वाद दिया। संचालन अमित जैन ने किया सभा में पंकज, अजय, अनिल सिद्धार्थ, कमल, दिनेश, अल्पना, स्नेह, कविता, दीपा आदि रहे।
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