- देश के कई राज्यों के साथ ही विदेश तक जाता है छुआरे का बना लड्डू
- चेन्नई में भेजने के लिए खाद्य विभाग ने तैयार की फाइल
संवाद न्यूज़ एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। निरपुड़ा गांव में पारंपरिक तरीके से बनाए जाने वाले छुहारे के लड्डू को जीआई टैग मिलेगा। इस खास उत्पाद की बढ़ती लोकप्रियता और पहचान को देखते हुए जीआई टैग के लिए फाइल तैयार कर ली गई है जो चेन्नई भेजी जाएगी। टैग मिलने के बाद लड्डू की ब्रांड वैल्यू और व्यापार में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।
निरपुड़ा के छुआरे के लड्डू की मांग न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान समेत कई राज्यों में है। यहां से विदेश में रहने वाले लोग भी लड्डू को वहां लेकर जाते हैं। इस तरह विदेशों तक इसका स्वाद लोगों को दीवाना बना रहा है। विदेशों में बसे लोग भी बड़ी तादाद में अपने लिए और अपने दोस्तों के लिए यह लड्डू मंगवाते हैं। सर्दी शुरू होते ही ऑर्डरों में तेजी आ जाती है। इसको देखते हुए ही प्रशासन ने छुआरे के लड्डू को जीआई टैग दिलाने का फैसला लिया है। जीआई टैग मिलने के बाद यह उत्पाद आधिकारिक रूप से बागपत की पहचान के रूप में दर्ज होगा। स्थानीय कारीगरों और व्यवसाय करने वालों में जीआई टैग को लेकर उत्साह है। उनका कहना है कि इससे छुआरे के लड्डू के स्वाद और पहचान को राष्ट्रीय व वैश्विक मंच मिलने का रास्ता खुलेगा। इसके साथ ही व्यापार भी बढ़ने की उम्मीद है।
- रटौल आम व बालूशाही को मिल चुका जीआई टैग
इससे पहले रटौल के आम और बालूशाही को जीआई टैग मिल चुका है। इनकी मांग भी काफी बढ़ी है और रटौल का आम अब विदेशों तक पहुंच रहा है। वहीं अब निरपुड़ा का लड्डू भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है। इससे वहां के दुकानदारों को काफी फायदा होगा। इससे अन्य जगह तक व्यापार शुरू होने की उम्मीद है।
- ऐसे बनता है निरपुड़ा का स्पेशल लड्डू
छुआरे को हथौड़ी से तोड़कर उसकी गुठली अलग की जाती है। उबलते दूध में छुहारे को धीरे-धीरे मिलाकर गाढ़ा होने तक पकाया जाता है। जब मिश्रण खोए जैसा हो जाता है, तब उसमें गुड़ या चीनी और देसी घी डाला जाता है। फिर लड्डू तैयार किए जाते हैं। बस यहीं से शुरू होती है उस स्वाद की यात्रा, जिसे लोग देश-विदेश तक लेकर जाते हैं।
- लागत के साथ बढ़ती गई कीमत
यह लड्डू तीन दशक पहले तक सिर्फ 20 रुपये किलो में मिलता था। आज इसकी कीमत 320 रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद ग्राहकों की भीड़ कम नहीं होती। सर्दी में छुआरे, घी और गुड़ या चीनी का मेल इसे न सिर्फ स्वादिष्ट बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद बनाता है। निरपुड़ा का यह लड्डू अब सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि गांव की पहचान, परंपरा और गौरव बन चुका है। यह दुनिया के कोने-कोने तक अपनी खुशबू बिखेर रहा है।
वर्जन
निरपुड़ा के छुआरे के लड्डू के लिए जीआई टैग का प्रस्ताव तैयार किया गया है। टैग मिलने के बाद इसकी विशिष्टता को कानूनी संरक्षण मिलेगा, नकल पर रोक लगेगी और विपणन तथा निर्यात की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी। - डीपी सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा विभाग