न कहीं इमारत और न ही कक्षा, लेकिन वर्षों से चल रहा था मदरसा। मदरसे के आधुनिकीकरण के नाम पर शासन से लगातार बजट लिया जाता रहा। शिकायत पर शासन ने 21 मदरसों की सूची जांच के लिए भेजी तो बड़ौत क्षेत्र के सूची में शामिल सभी 7 मदरसे फर्जी पाए गए। इन सभी मदरसों की मान्यता को रद्द कर दी गई है, जबकि अन्य 14 मदरसों की अभी जांच चल रही है। साथ ही इनको मान्यता देने वाले अधिकारी पर भी कार्रवाई की तैयारी है।
जांच अधिकारी नृपेंद्र नाथ अग्निहोत्री, बड़ौत के एसडीएम यशवर्धन श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने शासन से भेजे गई सूची में शामिल मदरसों की जांच की तो टीम भी हैरान रह गई। ग्राम गूंगाखेड़ी में मदर टेरेसा के नाम का मदरसा तो गांव में कभी रहा ही नहीं। निरपुड़ा का एमएस मदरसा, मदरसा सीवीएस दोघट, मदरसा इस्लामिया अरबी ग्राम बड़का, शहीद बिस्मिल स्कूल बड़ौत, जामिया अरबिया दावतुल इस्लाम इलबासिया अंगदपुर जौहड़ी समेत सात मदरसों की जांच में कोई भी मदरसा आधुनिक तो क्या, कक्षा तक नहीं मिलीं।
कहीं एक टीन शेड में दो कक्षाएं मिलीं, तो कहीं एक ही कमरा मदरसे के नाम पर दिखाया गया। न ही कहीं शौचालय मिला और न ही कहीं पीने का पानी, न ही मैदान। इन मदरसों के लिए 2010 से ही आधुनिकीकरण योजना के नाम पर शासन से लगातार बजट आता रहा। इसमें सभी विषयों के अध्यापक, कंप्यूटर के लिए बजट के अलावा बच्चों के लिए वजीफा भी दिया गया।
14 मदरसों की जांच अभी अधर में
अभी सिर्फ 7 मदरसों की ही हकीकत सामने आ सकी है। अभी शासन से भेजी गई सूची में शामिल 14 मदरसों की जांच लंबित है। ये सभी मदरसे बागपत तहसील के हैं और एसडीएम इसकी जांच कर रहे हैं। इन मदरसों की जांच के बाद तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पर गाज गिरना तय है। साथ ही अन्य मिलीभगत करने वाले अधिकारियों को भी चिन्हित किया जा रहा है।