बागपत/बड़ौत/खेकड़ा। लॉकडाउन ने पशुपालकों को जोर का झटका दिया है। दूध के दाम गिर गए हैं। अधिकतर कंपनियों ने सप्लाई बंद कर दी हैं। कंपनियों ने पशुपालकों का पेमेंट रोक लिया है। जबकि पशु आहार के दामों पर मुनाफाखोरी शुरू हो गई है। पशुपालक परेशान हैं।
पशुपालन कर घर का खर्च चलाने वाले किसानों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। लॉकडाउन में पशु आहार और पशुओं की दवाई पर रोक नहीं है, लेकिन एकाएक दाम बढ़ा दिए गए हैं। सिनौली गांव के किसान विपिन पूनिया ने बताया कि जो खल की बोरी पहले 1550 से 1650 रूपये तक थी, वो अब पशुपालकों से 2100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। चोकर का जो कट्टा 1100 रुपये का था, अब 1350 रुपये वसूले जा रहे है। निमेष पालीवाल व मुखिया प्रधान का कहना है कि डेयरी मालिकों ने भी किसानों का दूध का पेमेंट रोक दिया है।
सरूरपुर कलां निवासी सुभाष नैन का कहना है कि दूध कंपनियों ने दूध की सप्लाई लेनी बंद कर दी हैं। गाय के दूध की कीमत पहले 49 रुपये प्रति किलो थी, जो अब केवल 36 रुपये में लिया जा रहा है। अगर फैट कम मिलता है तो दाम 30 रुपये तक गिर गए हैं। इससे पशुपालक परेशान हैं। अहेड़ा गांव के राजवीर और उमेश का कहना है कि दूध के दाम गिर गए हैं और पशु आहार के बढ़ गए हैं।
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