बागपत। सोशल ऑडिट की रिपोर्ट में मजदूरों के खातों में 30,107 रुपये डालने का मामला प्रकाश में आया। बिनौली ब्लॉक में मनरेगा में धांधली और गलत तरीके से कार्य दर्शाएं हैं। जॉब कार्ड रसीद तक जारी नहीं किए हैं। सुविधा शुल्क देकर खातों में फर्जी तरीके से रुपये डाले गए।
मनरेगा के कार्यों में हो रहे घोटालों से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। इस बार तो सोशल ऑडिट टीम ने जांच रिपोर्ट में घोटाले और कार्य न होने दर्शाया है। सोशल ऑडिट की टीम ने बिनौली ब्लॉक में जांच पड़ताल की। जांच में घोटाला होना पाया गया। गलत तरीके से मजदूरों के खातों में धनराशि डाली गई। मनरेगा मजदूर फमिदा के खातों में दो किश्तों में 15295 रुपये गलत तरीके से डाले गए। प्रकरण यह ही नहीं रुका छोटी के खाते में 2898, इरशाद के खातों में 4508 और 2254 रुपये का भुगतान किया । कय्यूम के खाते में 2576 और साकेत के खाते में 2576 रुपये का गलत तरीके से भुगतान हुआ। बसपाल के खातों में भुगतान करा दिया, लेकिन सुविधा शुल्क लेकर वापस ले लिया।
जांच रिपोर्ट में विभिन्न कार्यों को फर्जी तरीके से कराया। खंड़जा निर्माण हुआ नहीं, लेकिन निर्माण कार्य दर्शाया गया है। जॉब कार्ड रसीद जारी नहीं किया। ग्राम पंचायतों की दीवारों को वॉल पेंटिंग नहीं कराई। कार्य स्थल पर वित्तीय वर्ष 2015-16 में कराए कार्य पर नागरिक सूचना पद नहीं कराया। मजदूरों को नियमित भुगतान और अनुश्रवण नहीं किया। रिपोर्ट में ग्राम सभा की बैठक के दौरान जिलाधिकारी द्वारा नामित पर्यवेक्षक अधिकारी उपस्थित नहीं हुए। यह ही नहीं सभा में ग्राम सचिव स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। डीडीओ हुब लाल ने बताया सोशल ऑडिट की रिपोर्ट के आधार पर गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट विभागीय अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। रिकवरी के लिए उच्च स्तरीय जांच होगी। सही मिलने पर रिकवरी होगी।
200 - 300 रुपये देकर खाते में डलवाई जाती थी नगदी
सोशल ऑडिट टीम की जांच के अनुसार छोटी ने बताया उसे 200 से 300 रुपये देकर खातों में रुपये डलवाए जाते थे, इसके बाद उन रुपयों को निकलवाया जा रहा है। उसके खातों में भी 15 हजार से अधिक धनराशि डाली गई थी। यह ही नहीं खुर्शेद से भी इसी प्रकार कार्य कराया।
मनरेगा की फाइलों में हो रहे विकास कार्य
विभाग के सभी कार्य कागजों में हो रहे हैं। जिसका खुलासा सोशल ऑडिट की रिपोर्ट में हो गया है। कहीं उन्हें विकास कार्य होता नहीं मिला, केवल कागजों में ही सभी कार्य दर्शाए गए हैं। मजदूरों के खातों में बिना कार्य किए भुगतान हो रहा है।