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Baghpat News: शहीद स्मारक का होगा पुनर्विकास, बनेगी कैंटीन

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शहीद स्मारक स्थल पर भूमि दानदाता स्व. महावीर शर्मा की प्रतिमा का अनावरण करते उत्तराखंड के मुख्य
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मुजफ्फरनगर। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आंदोलनकारी शहीदों के सपनों को साकार किया जाएगा। रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक स्थल का री डेवलपमेंट प्लान तैयार होगा। संग्रहालय भी बेहतर और व्यवस्थित बनाया जाएगा। शहीद स्थल पर एक कैंटीन की स्थापना होगी।
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उन्होंने शहीद स्मारक स्थल के लिए भूमि दान करने वाले महावीर शर्मा की प्रतिमा का अनावरण भी किया। उन्होंने कहा कि रामपुर तिराहा कांड के बाद आसपास के लोगों ने पीड़ितों की मदद के लिए इंसानियत को जीवित रखा है। यह स्मारक जहां शहीदों के बलिदान का साक्षी है, वहीं इंसानियत और भाईचारे की कहानी भी बयां करता है।
रामपुर तिराहा पर उत्तराखंड की सभी सरकारी बसों के लिए एक विशेष ठहराव की व्यवस्था की जाएगी, ताकि उन्हें शहीदों के बारे में अवगत कराया जा सके। सरकार ने रामपुर, सिसौना और बागोवाली गांवों में दोनों राज्यों के बीच मैत्री बढ़ाने के उद्देश्य से जन मिलन केंद्र बनाने का निश्चय किया है।
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उत्तराखंड सरकार के मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पृथक राज्य के लिए हुए आंदोलन के दौरान रामपुर तिराहा पर सरकार ने आंदोलनकारियों पर क्रूरता की थी। आंदोलन के दौरान वह भी गोपेश्वर से 350 किमी. की यात्रा कर रामपुर तिराहा पहुंचे थे। मंच पर मौजूद महावीर शर्मा के सुपुत्र पप्पू शर्मा व उनकी पत्नी अलका शर्मा ने सीएम धामी को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। पप्पू शर्मा ने कहा कि उनके पिता ने इंसानियत को जीवित रखने के लिए भूमि दान की और उनके संकल्प को पूरा परिवार उत्तराखंड राज्य की सेवा के लिए समर्पित रहेगा। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर मुजफ्फरनगर के लोगों ने अपने दायित्व का निर्वहन किया था।
जलियांवाला बाग हत्याकांड से भी क्रूर थी घटना
शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से ही ज्यादती का शिकार हुई आंदोलनकारी महिलाओं को न्याय मिला। धामी ने कहा कि रामपुर तिराहा कांड उत्तराखंड समेत देश के इतिहास में काला अध्याय है। सपा सरकार में यह क्रूर घटना घटी। इसके लिए जनता जिम्मेदार लोगों को कभी माफ नहीं करेगी। यह घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से भी ज्यादा क्रूर थी। न्यायालय ने भी अपने फैसले के दौरान की गई टिप्पणी में इसे माना है। यह सपा सरकार की दमनकारी नीति का हिस्सा रही, इसकी शुरुआत एक सितंबर 1992 को खटीमा और इसके अगले दिन मसूरी गोलीकांड से हो चुकी थी। बालियान ने केंद्र में मंत्री और मुजफ्फरनगर से सांसद रहते हुए इन मुकदमों की मजबूत पैरवी में सहयोग दिया।
रामपुर तिराहा दोनों राज्यों को गहरे संबंध में बांधता है: बालियान
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि शहादत से ही उत्तराखंड का जन्म हुआ है। यह तिराहा ही दोनों राज्यों को गहरे संबंध में बांधता है। इस कांड के बाद भी दोनों राज्यों में आपसी भाईचारा और लगाव का रिश्ता पहले की भांति ही मजबूत है। 31 साल पहले आज ही के दिन वह काला अध्याय लिखा गया। जो कोई याद करना नहीं चाहता। 30 साल तक पीड़ितों ने मुकदमे लड़े और अब न्याय मिलना प्रारंभ हुआ।


भूमि दानकर्ता महावीर प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण
दो अक्तूबर 1994 की रात को दिल्ली जा रहे राज्य आंदोलनकारियों की बसों को रोका गया और फिर संघर्ष में पुलिस की गोलियों से सात आंदोलनकारी शहीद हो गये। आंदोलनकारी महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और ज्यादती की घटनाएं भी सामने आईं। संकट के ऐसे समय में स्थानीय निवासी महावीर प्रसाद शर्मा ने अपनी पत्नी स्व. संतोष देवी और ग्रामीणों संग आगे आकर बड़े पैमाने पर पीड़ितों की मदद की। गोलीकांड के मुकदमों में पुलिस व प्रशासन के अफसरों के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की ओर से सीबीआई के गवाह भी बने। उन्होंने शहीद स्मारक के लिए अपनी डेढ़ बीघा भूमि संस्कृति विभाग उत्तराखंड को दान दी। उनकी भूमि के साथ संस्कृति विभाग ने करीब साढ़े सात बीघा भूमि पर रामपुर तिराहा गोलीकांड शहीद स्मारक का निर्माण कराया।
संस्कृति सचिव उत्तराखंड युगल किशोर पंत ने बताया कि इस शहीद स्थल पर मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने भी 2024 में 30वीं बरसी पर मूर्ति स्थल निर्माण का शिलान्यास किया था। 14.75 लाख रुपये के बजट से महावीर प्रसाद शर्मा की मूर्ति स्थापित की गई है। अनिरुद्ध उर्फ पप्पू शर्मा, अलका शर्मा, शहीद स्माकर प्रभारी शुभम शर्मा, हिमानी शर्मा और पोती मोहिनी शर्मा सहित सत्यप्रकाश रेशु मौजूद रहे।
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