बागपत। यूपी की चीनी मिलों को गन्ना क्षेत्र आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। सबसे पहले मेरठ मंडल की चीनी मिलों के गन्ना तौल केंद्र और गन्ना आवंटन पर फैसला होगा। इसके लिए दो अक्तूबर को लखनऊ में मीटिंग बुलाई। इस बैठक में मलकपुर चीनी मिल का गन्ना क्षेत्र घटने की संभावना जताई जा रही है।
जिले में तीन शुगर मिले हैं, लेकिन यहां के किसान मेरठ और सहारनपुर मंडल की दस चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं। नए पेराई सत्र में गन्ना आवंटन और तौल केंद्र को लेकर गन्ना आयुक्त विपिन द्विवेदी की अध्यक्षता में लखनऊ में दो अक्तूबर को महत्वपूर्ण बैठक होगी। सूबे में सबसे पहले मेरठ मेडल की बैठक हो रही है।
हालांकि मिलों से पहले ही पेराई सत्र के लिए सूचनाएं मांग ली गई थी। जिले की बागपत और रमाला चीनी मिल ने किसानों का पूर्ण भुगतान कर दिया है, जबकि मलकपुर चीनी मिल पर अभी 235 करोड़ रुपये बकाया है। इस कारण किसान भी मिल प्रबंधन से नाराज है। चौबीसी खाप ने पहले ही मिल को गन्ना नहीं देने का फैसला किया है। यही नहीं इस बार बड़ौत के आसपास के किसान भी अन्य मिलों के तौल केंद्र यहां लगवाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में इस बार मलकपुर मिल के तौल केंद्रों पर कैंची चल सकती है।
जिले में सबसे अधिक गन्ने की पेराई मलकपुर चीनी मिल ही करती है। अन्य दो मिलों की पेराई क्षमता कम है। जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार ने कहा दो अक्तूबर को लखनऊ में मीटिंग होगी। किस मिल को कितना गन्ना मिलेगा, कहां कितने तौल केंद्र रहेंगें, यह इसी मीटिंग में तय होगा। इस पर पहले से कुछ नहीं कहा जा सकता।