उन्होंने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ भी शनिवार को मुरादाबाद में चौधरी चरण सिंह की जयंती मनाने पहुंचे थे। उनसे उम्मीद थी कि किसानों के लिए कुछ घोषणा होगी, लेकिन न गन्ने का मूल्य घोषित हुआ और न अभी तक बिजली मुफ्त हुई है।
पुलिस को भ्रष्टाचारी बनाने और एफआईआर कम करने को बदले कानून
चौधरी जयंत सिंह ने कहा कि अंग्रेजों के समय के कानून को बदला गया है, लेकिन पुलिस को भ्रष्टाचारी बनाने और एफआईआर कम करने के लिए कानून बदले गए हैं। इससे जनता का उत्पीड़न होगा। कानून को लेकर हमें संसद में विरोध का मौका नहीं दिया गया क्योंकि चर्चा ही नहीं हुई। हम इंडिया गठबंधन की पार्टियों ने रणनीति बनाई है कि पहले देखा जाएगा कि राष्ट्रपति मुहर लगाते हैं या नहीं। उसके बाद कोई फैसला लिया जाएगा।
विरोध होने पर ही फैसले बदलती है भाजपा सरकार
चौधरी जयंत सिंह ने कहा कि भाजपा की शैली है कि पहले फैसले लेकर चोट मारते हैं और उसके बाद विरोध होने पर उसे बदलते हैं। गन्ने के रस से एथनॉल का उत्पादन बंद करने के फैसले का विरोध होने पर सरकार ने निर्णय बदला। कृषि कानूनों को लेकर भी विरोध होने पर 13 महीने बाद उनको वापस लेना पड़ा। भारतीय कुश्ती संघ के चुनाव में यही देखने को मिला। खिलाड़ी के संन्यास लेने, पद्मश्री वापस करने पर सरकार को जागकर उसे भंग करना पड़ा। भ्रष्टाचारी लोग, गबन करने वालों को बाहर कर देना चाहिए था।
मिमिक्री को जाति से केवल भाजपा सरकार जोड़ रही
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के मिमिक्री करने को लेकर चौधरी जयंत सिंह ने कहा कि इसे केवल भाजपा ही जाति से जोड़ रही है। जाटों को लेकर पश्चिमी उप्र, हरियाणा में सबसे ज्यादा कहावतें हैं। लेकिन कोई बुरा नहीं मानता है। यहां जातिसूचक शब्द का प्रयोग किया जाता तो तब विरोध करना जायज था। मिमिक्री ब्रिटिश पार्लियामेंट में देखो, वहां सदन की कार्रवाई में होती है। व्यक्तिगत टिप्पणी करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी। उपराष्ट्रपति विद्वान व्यक्ति है, उनको अपनी ताकत समझनी चाहिए और इस तरह के विवाद से दूर रहना चाहिए।
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