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Baghpat News: फोन पर बात करने के शक में पत्नी की हत्या करने वाले को उम्रकैद

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शामली के लिए भी
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-मई 2021 में मृतका की मौसी ने छपरौली थाने में दर्ज कराया था मुकदमा, दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया

संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। फोन पर बात करने के शक में गला घोटकर पत्नी की हत्या करने वाले पति को न्यायाधीश ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई और दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर हत्यारे पति की दो माह की सजा बढ़ाई जाएगी।

जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मई 2021 में शामली की नत्थे देवी ने छपरौली थाने में मुकदमा दर्ज कराया। नत्थो ने आरोप लगाया कि उसकी भांजी प्रियंका निवासी पट्टी भड़ाला ऊन जनपद शामली की शादी चार साल पहले रठौड़ा गांव के सुनील के साथ हुई थी। शादी के बाद सुनील अपनी पत्नी प्रियंका पर किसी से फोन पर बात करने का शक करने लगा और आठ मई 2021 की दोपहर गला दबाकर प्रियंका की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और जांच के बाद आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया। जिला एवं सत्र न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल नेहरा ने सजा सुनाई जाने के लिए बहस की। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने सुनील को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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पक्षद्रोही हुए गवाह, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साबित की हत्या, बचाव पक्ष नहीं दे पाया दलील
जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल नेहरा ने बताया कि प्रियंका की हत्या के बाद पुलिस ने एक फोन, हत्या में प्रयुक्त रस्सी बरामद कर सुनील को जेल भेज दिया। इसमें सुनील की तरफ से बचाव पक्ष में प्रियंका के आत्महत्या करने का दावा किया। इस मुकदमे में वादिनी नत्थो समेत कई लोगों को गवाह बनाया गया। सुनवाई के दौरान कई गवाह अपनी गवाही से मुकर गए, जबकि वादिनी ने मुकदमे के पक्ष में गवाही दी। साथ ही मोबाइल और रस्सी भी बरामद की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के गले में हायड बोन नाम की हड्डी टूटने से मौत होना बताया गया, जो हत्या या हत्या के प्रयास में ही टूटती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रियंका की हत्या होना साबित हुआ और इन्हीं सबूतों के आधार पर सुनील पर दोषसिद्ध कर आजीवन कारवास की सजा सुनाई गई। इस प्रकरण में बचाव पक्ष कोई दलील नहीं दे पाया।
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बिन मां-बाप की बेटी को मिला न्याय
बताया गया कि प्रियंका के माता-पिता की पहले ही मौत हो गई थी। इसके बाद उसके रिश्तेदारों ने उसका पालन पोषण कर शादी कराई। शादी के बाद हुए झगड़े के बाद समझौता कराने के लिए मौसी ही आती थी और पैरवी भी की। सुनील को सजा सुनाई जाने के बाद परिवार वाले कहने लगे कि बिन मां-बाप की बेटी को न्याय मिल गया।
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