मुलसम गांव के जंगल में शनिवार को मिला था मादा तेंदुए का शव
चार घंटे तक चला मादा तेंदुए का पोस्टमार्टम, बरेली भेजे गए सैंपल
वन संरक्षक ने लापरवाही पर लगाई कर्मियों को फटकार, मांगा जवाब
संवाद न्यूज एजेंसी
बिनौली (बागपत)। मुलसम गांव के जंगल में मादा तेंदुए की मौत छह दिन पूर्व ठंड के चलते निमोनिया होने से हो गई थी। इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ है। शव सड़ चुका था। इस पर वन संरक्षक मेरठ गंगा प्रसाद ने वन कर्मियों को गश्त में लापरवाही करने पर जमकर फटकार लगाई। चार घंटे चले पोस्टमार्टम के बाद कुछ सैंपल लेकर बरेली जांच के लिए भेजे गए। संतनगर नर्सरी में शव का अंतिम संस्कार किया गया।
रविवार को संतनगर नर्सरी में मादा तेंदुए का पोस्टमार्टम हुआ। दोपहर 12 से शाम चार बजे तक पोस्टमार्टम चला। पशु चिकित्साधिकारी बामनौली डॉ. रोहित सिंह, पशु चिकित्साधिकारी निरपुडा डॉ. पूर्णचंद, पॉली क्लीनिक बिजरौल के पशु चिकित्साधिकारी डॉ आशुतोष ने बताया कि ठंड के कारण मादा तेंदुए को निमोनिया हो गया था। छह दिन पूर्व ही उसकी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद सैंपल बरेली आईडीआर लैब भेजे गए। वन संरक्षक मेरठ गंगा प्रसाद ने भी मौके पर पहुंच कर मामले की जानकारी ली। उन्होंने बिनौली क्षेत्र में तैनात वन दरोगा विनय, दीपक सिरोही सहित अन्य को जमकर लताड़ लगाई। पूछा कि क्या जंगल में रोजाना गश्त नहीं करते। कर्मचारियों ने जवाब दिया कि करते है। इस पर वन संरक्षक भड़क गए और नाराजगी जताते हुए बोले कि यदि गश्त करते तो छह दिनों तक मृत पड़े मादा तेंदुए का शव इस तरह सड़ता नहीं रहता। कर्मचारियों से लिखित में जवाब मांगा गया है। उन्होंने वन रेंजर राजपाल को भी खरीखोटी सुनाई। साथ ही पूरे मामले में डीएफओ हेमंत सेठ से रिपोर्ट मांगी है।
इस दौरान एजूकेटिव डायरेक्टर एशियन एलिफेंट जीएस कुसारिया, रेंजर राजपाल सिंह, वन दरोगा रविकांत चौधरी, वन रक्षक बड़ौत संजय कुमार, मोहित कुमार, वन दरोगा दीपक सिरोही, विनय, वन दरोगा चंद्रकिरण, दयाकृष्ण, वन रक्षक संजीव आदि शामिल रहे।
ग्रामीणों के आरोप अवैध कटान में लिप्त है लापरवाह कर्मचारी
मुलसम, संतनगर, बरनावा आदि गांवों के ग्रामीण कल्लू, इसरार, मेहरबान, नीटू, विकास, जयवीर का आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारी क्षेत्र में अवैध कटान तो करा रहे है, लेकिन वन जीवों की सुरक्षा को लेकर उनका जरा भी ध्यान नहीं है। उन्होंने इस मामले में पूरी जांच कर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पोस्टमार्टम कर लीवर, किडनी, हार्ट सहित पांच अंग के सैंपल बरेली भेजे गए। ताकि रिपोर्ट आने पर ही मौत का सही कारण पता चल सके। उन्होंने बताया कि यह कर्मचारियों की लापरवाही ही रही कि छह दिनों तक जंगल में मादा तेंदुआ मृत पड़ा रहा, लेकिन इसकी सुध नहीं लगी। लापरवाह कर्मचारियों से जवाब भी मांगा गया है। - गंगा प्रसाद, वन संरक्षक मेरठ मंडल।