बागपत। गांव चमरावल के रॉयल कान्वेंट स्कूल में यूकेजी के छात्र आयुष की मौत के बाद स्कूलों व बसों की जांच शुरू हुई तो हड़कंप मच गया। शहर से लेकर देहात तक के स्कूलों में छात्र की मौत के कारण शोक बताकर शुक्रवार को छुट्टी कर दी गई। रोजाना सड़कों पर दौड़ने वाली खटारा बसों को भी खड़ा करवा दिया गया। कारण यह रहा कि बागपत जनपद के 80 प्रतिशत स्कूलों में शिक्षा विभाग के पूरे नियमों का पालन ही नहीं किया जाता है। यही कारण है कि कार्रवाई के डर से छुट्टी कर दी गई।
रॉयल कान्वेंट स्कूल में बृहस्पतिवार की सुबह छात्र आयुष की मौत हो गई थी। इसे लेकर कई घंटे तक हंगामा भी हुआ। इस पूरे मामले में स्कूल की मान्यता को लेकर सवाल उठे और बस का परमिट नहीं होने के साथ ही अनफिट मिली। इसके बाद डीएम राजकमल यादव ने 50 टीमों का गठन कर सभी स्कूलों की मान्यता और नियमों की जांच के आदेश दिए थे। शिक्षा, परिवहन और अन्य संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस टीमों में शामिल किया गया है। डीएम ने यह आदेश बृहस्पतिवार देर शाम किए, जिनके बारे में स्कूल संचालकों को शुक्रवार सुबह पता चला। इससे स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया। जांच से बचने के लिए आयुष की मौत के कारण शोक बताकर सुबह स्कूल पहुंचे बच्चों को छुट्टी बताकर लौटा दिया। शहरों के कुछ स्कूल बंद किए गए जबकि देहात के अधिकतर स्कूल अचानक बंद कर दिए गए।
स्कूलों के गेट पर छुट्टी बताकर वापस भेजे बच्चे
बच्चे रोजाना की तरह शुक्रवार सुबह भी स्कूल पहुंचे। गेट पर बताया गया कि आयुष की मौत पर शोक जताने के लिए छुट्टी की गई है। किसी स्कूल में कारण भी नहीं बताया गया। उधर, छुट्टी करने वाले स्कूलों की कार्यप्रणाली पर इसलिए भी सवाल उठ रहा है कि शहरी क्षेत्र के कुछ स्कूलों ने छुट्टी करने की जगह स्कूल में मौन रखकर और मोमबत्ती जलाकर आयुष को श्रद्धांजलि दी।
स्कूलों ने अपनी खटारा बसें सड़क पर नहीं उतारी
कुछ स्कूलों ने अपनी बसों को खरीदकर बच्चों को लाने और लेकर जाने में लगाया हुआ है। मगर, कुछ स्कूल संचालकों ने बस मालिकों से अनुबंध किया हुआ है कि वह बच्चों को लेकर आएंगे और स्कूल से घर तक छोड़ेंगे। अधिकतर स्कूलों में छुट्टी कर दी गई थी। ऐसे में जिन स्कूलों को खोला गया था, उन्होंने भी अपनी खटारा बसों को कार्रवाई से बचने के लिए सड़क पर नहीं उतारा। ठेके पर लगाए गए अधिकांश स्कूली वाहन ही परिवहन विभाग के अधिकारियों के शिकंजे में फंसे।
डीआईओएस कार्यालय में यूपी बोर्ड के 142, 55 सीबीएसई स्कूल पंजीकृत
डीआईओएस कार्यालय में यूपी बोर्ड के 142 स्कूल और सीबीएसई के 55 स्कूल पंजीकृत है। इनमें 19 राजकीय कॉलेज है और 70 एडेड और 52 कालेज वित्तविहीन है। इनके अलावा सीबीएसई से मान्यता प्राप्त 55 स्कूल है। इन सभी में टीम जाकर जांच करेगी।
बेसिक शिक्षा विभाग से 413 स्कूलों को मान्यता मिली
कक्षा स्कूल
एक से आठवीं 145
एक से पांचवीं 154
एक से बारहवीं 43
छह से बारहवीं 20
एक से दसवीं 9
छठीं से दसवीं 8
छठीं से आठवीं 34
प्राथमिक स्कूलों के लिए यह नियम जरूरी
- निजी या 25 साल की लीज पर भवन होना चाहिए
- स्कूल से संबंधित सभी नियम, समय सारणी आदि जानकारी विभागीय साइड पर अपलोड करनी होगी
- कक्ष 180 वर्ग फुट होना चाहिए, एक कक्ष में केवल बीस बच्चे बैठने चाहिए।
- पेयजल व बिजली की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
- अग्निशमन यंत्र जरूर होने चाहिए
- क्रीड़ास्थल भी जरूर होना चाहिए
- बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए शौचालय का निर्माण होना चाहिए
- भवन जर्जर होने की स्थिति में विभाग को तुरंत सूचना दी जानी चाहिए
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स्कूल बसों के लिए यह नियम
- ट्रांसपोर्ट परमिट होना चाहिए।
- चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव हो।
- स्कूल बस पीले रंग से पेंट होनी चाहिए।
- बस के आगे व पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
- शीशों के साथ ही लोहे के पाइप व जाली लगी होनी चाहिए।
- बस के अंदर अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।
- स्कूल वाहन की गति 40 किमी प्रति घंटा से अधिक नहीं हो।
- बस में फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए।
- बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए।
- स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
- दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
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अभिभावक भी इन बातों का रखे ध्यान
- बस खड़ी होने पर ही बच्चों को चढ़ाएं।
- चालक के बारे में पूरी जानकारी रखे और उसका चरित्र प्रमाण पत्र भी देखें।
- बस में एक हेल्पर है या नहीं।
- बच्चों के आने और जाने के समय पर ध्यान रखें।
- बस के अंदर बच्चों को बैठने के लिए जगह मिल रही हैं या नहीं।
- बस में सुरक्षा मानकों का पालनप्र रहा है या नहीं।
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स्कूलों की छुट्टी करके कोई नहीं बच सकता है। जब भी स्कूल खुलेगा, तभी उसकी जांच कराई जाएगी। संसाधन व सुरक्षा नियमों की जांच कराई जाएगी। बसों की जांच भी होगी। हमारी जानकारी में लगातार ऐसे स्कूल आ रहे है, जिनपर कार्रवाई होगी। - राजकमल यादव, जिलाधिकारी
आप भी करो नियमों का पालन: बागपत में बिना हेलमेट के बच्चों को नेशनल हाईवे से घर ले जाता अभिभावक- फोटो : BAGHPAT
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