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संघर्ष में तपकर कुंदन बनें हैं स्वयं सहायता समूह

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बागपत के बसंत गार्डन में प्रेरणा दिवस में महिलाओं को सम्मानित करती जिला पंचायत अध्यक्ष रेणू धाम? - फोटो : BAGHPAT
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संघर्ष में तपकर कुंदन बनें हैं स्वयं सहायता समूह
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बागपत। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वरोजगार क्षेत्र में कदम बढ़ाने वाले स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को सांसद सत्यपाल सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष रेणू धामा और डीएम शकुंतला गौतम ने सम्मानित किया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाएं किसी भी मुश्किल स्थिति में घबराएं नहीं, बल्कि आगे बढ़ने के लिए संघर्ष करती रहें। संघर्ष से ही मंजिल मिलती है। संघर्ष में तपकर ही स्वयं सहायता समूह कुंदन बने हैं।
बड़ौत रोड स्थित बसंत गार्डन में मंगलवार को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रेरणा दिवस का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष रेणू धामा, डीएम शकुंतला गौतम और सीडीओ पीसी जायसवाल ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। सांसद डॉ. सत्यपाल सिंह समापन के मौके पर कार्यक्रम में शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह के जरिये अपने हुनर का कमाल दिखाया है। नारी शक्ति किसी से कम नहीं है। मौका मिलते ही खुद को साबित करने में वह पीछे नहीं हटती है। महिलाओं ने गांव स्तर पर शुरू किए गए कार्यों से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाकर जिले का मान बढ़ाया है। यह जरूरी हैं कि जो महिलाएं कामयाब हुई हैं, अब वह दूसरों के लिए प्रेरणा बनें और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। इस दौरान स्वयं सहायता समूहों ने अपने द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई। अतिथियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर उत्पादों को न केवल सराहा बल्कि खरीदा भी। डीडीओ हुबलाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी विमल कुमार ढाका, बीडीओ स्मृति अवस्थी, जिला महिला कल्याण अधिकारी दीपांजली, महिला बाल कल्याण अधिकारी शालू, जिला समन्वयक अनीसा मौजूद रही।
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योजनाओं की दी जानकारी
एनआरएलएम के डीसी बीबी सिंह ने कहा कि स्वरोजगार महिलाओं के लिए अच्छा प्लेटफार्म है, जिस पर कदम बढ़ाकर महिलाओं का जीवन स्तर बदल रहा है। इस दौरान महिलाओं को सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी गई।
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महिलाओं ने सुनाई कामयाबी की कहानियां
प्रेरणा कार्यक्रम में विभिन्न सहायता समूह की महिलाओं ने अपनी-अपनी कामयाबी की कहानियां सुनाई। खेती से लेकर सिलाई तक के कार्य के अनुभव साझा किए। जिवाना गांव की रेनू ने बताया कि वर्ष 2015 में उसके पिता के पैर में चोट लग गई थी, इसके बाद उसने कक्षा नौ में पढ़ाई छोड़ दी। उसके बाद वह खेत में 150 रुपये रोज की मजदूरी करने लगी, जो अपने पिता की दवाई पर खर्च करती थी। उसके बाद किसी ने उसको समूह में शामिल होने के लिए कहा तो वह 2018 में समूह में शामिल हुई और चारपाई बनाने का कार्य कर आगे बढ़ी। अब वह गांव में अन्य लोगों को भी आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ा रही हैं।
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