कृष्णा नदी के किनारे बसा गांगनौली गांव आज महामारी की चपेट में है। इस गांव में प्रदूषित जल के कारण अब तक कैंसर से एक दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकार इसके प्रति मूकदर्शक बनी हुई है।
गांगनौली गांव में कृष्णा नदी के किनारे पर बसा हुआ है। काफी सालों पहले इस नदी में गांव के पास पानी का स्तर ऊंचा उठाने के उद्देश्य से डैम बनाया गया था, लेकिन इस नदी में लगातार मिलों व फैक्ट्रियों द्वारा इसमें प्रदूषित पानी डाला जा रहा है, जिसकी शिकायत उच्चाधिकारियों को कई बार कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
इस कारण इस नदी के किनारे बसे प्रत्येक गांवों में कैंसर जैसी घातक बीमारी ने अपना घर बना लिया है और हजारों लोग मौत की नींद सो चुके हैं। इस नदी के किनारे बसे गांगनौली गांव में भी कैंसर जैसी बीमारी ने अपना प्रवेश कर लिया है।
इस नदी का प्रदूषित पानी भूगर्भ में पहुंच चुका है। गांव के हैंडपंप व समर्सिबल जहरीला पानी दे रहे हैं, जिसके पीने से अब तक एक दर्जन लोगों की मौत हो चुकी हैं।
गांगनौली में इस जहरीले पानी के इस्तेमाल से अब तक कैंसर की बीमारी से भगवान, रामकली, भोपाल, निरंजन, रघुवीर, शिवकुमारन, वीरसैन समेत एक दर्जन लोगों की मृत्यु हो चुकी है। प्रदेश की नदियों में हो रहे प्रदूषण के संबंध में दोआबा परियोजना दाहा के अध्यक्ष डॉक्टर चंद्रवीर राणा ने एनजीटी में याचिका दायर की थी।
नदियों में प्रदूषण को लेकर एनजीटी ने उप्र व उत्तराखंड के मुख्य सचिवों को इस मामले में तलब किया है। ग्राम प्रधान धर्मेंद्र राठी ने बताया कि प्रदूषित जल के कारण इस समय गांव के रघुवीर, लक्ष्मी, विनोद, ओमसिंह, तिरूपति आदि कैंसर की बीमारी से पीड़ित है, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।