खेकड़ा (बागपत)। शहर में पांडव चौक पर श्री बालाजी रामलीला कमेटी की ओर से चल रही रामलीला के छठे दिन रामलीला का विधिवत शुभारंभ मुख्य अथिति संदीप शर्मा सोनीपत, प्रदीप जैन, पंकज यादव और वैभव जैन ने भगवान राम, लक्ष्मण की आरती उतारकर किया।
मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि राजा दशरथ के दोनों वरदानों को पूरा करने के लिए पुरुषोत्तम श्रीराम माता सीता एवं लक्ष्मण के साथ वन के लिए प्रस्थान करते हैं। समस्त नगरवासी रोते हैं, और प्रभु राम को वन जाने से रोकने का प्रयास करते हैं। लेकिन प्रभु राम अपने मुखमंडल पर हल्की सी मुस्कुराहट को लेकर नगरवासियों से विदाई लेते है। और तपस्वी विवेक धारण करके वन की तरफ प्रस्थान करते हैं। दशरथ पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग देते है। उधर, प्रभु राम केवट को पुकारते हैं कि हमें नदी के पार जाना है। अपनी नाव लेकर आओ। लेकिन केवट नाव नहीं लाता है। और कहता है प्रभु पहले मैं आप के चरण धोऊंगा उस के बाद आप को अपनी नैया में बैठने दूंगा। केवट के आग्रह को श्रीराम ने स्वीकार किया और पैर धोने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद केवट ने राम, लक्ष्मण, सीता और निषादराज को अपनी नाव में बैठाकर गंगा नदी पार करवा दी। भरत को ननिहाल में सोते हुए महसूस होता है कि अयोध्या में कुछ संकट है। अगले दिन दूत उनको अयोध्या बुलाने के लिए आता है। भरत को अयोध्या में जाकर पता चलता है कि पिताजी का स्वर्गवास और भाई राम को 14 साल का वनवास हो गया है। वो केकैयी को बुरा भला कहता है। फिर भरत श्रीराम जी को मनाने का प्रण करता है। इस दौरान श्री बालाजी रामलीला कमेटी के प्रधान नितिन जैन, डायरेक्टर राजेश शर्मा, उप प्रधान नरेंद्र शर्मा, कोषाध्यक्ष संजीव जैन, सचिव प्रवीण यादव, संस्थापक राजेन्द्र यादव, संरक्षक आनंद यादव, धर्मवीर यादव, अजय शर्मा, दीपक कुमार, मनोज जैन, डा मनोज धामा, आकाश जैन, मोहित जैन, गौरव वर्मा आदि मौजूद रहे।
उधर श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में गांधी प्याऊ पर चल रही रामलीला के पांचवें दिन राम वनवास की लीला का मंचन हुआ। केकैयी के वर मांगने और राम को वनवास का हुकुम मिलते ही अयोध्यावासी रो पडे़। रामलीला का शुभारंभ बृजेश शर्मा, नरेंद्र शर्मा ने भगवान राम, सीता व लक्ष्मण की आरती उतार कर किया। मंचन में राजा दशरथ राम को राजपाठ देने के लिए राम के राजतिलक की घोषणा करते है। रानी की दासी मंथरा नाराज होती है और रानी से कहती है। कि तुम्हारा पुत्र भरत राम का दास हो जाएगा। केकैयी नहीं मानती है। लेकिन बार बार मंथरा के समझाने पर मान जाती है। इस पर मंथरा बताती है कि राजा दशरथ से दो वरदान मांगने का समय आ गया है। तुम राम के लिए 14 वर्ष का वनवास एवं भरत के लिए राजगद्दी राजा से मांग लो। रानी राजा दशरथ से वरदान मांग लेती है। वादे से मजबूर राजा मान लेते है। राम के वन जाने की सूचना पर अयोध्या वासी रो पडते है। इस दौरान डायरेक्टर उमेश शर्मा, प्रधान अरविंद शर्मा बोबी, नरेश शर्मा, दीपक शर्मा, पुनीत शर्मा, अनुज शर्मा, अनिरुद्ध गौड़ आदि मौजूद रहे।
खेकड़ा नगर मे पांडव चौक पर रामलीला का मंचन करते श्री बालाजी रामलीला कमेटी के कलाकार- फोटो : KAHKRA