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कोरोना संक्रमण से थमेगी कांवड़ यात्रा?

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बागपत। दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल कांवड़ यात्रा पर भी इस बार संशय के हालात बन गए हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण इस बार कांवड़ियों का रैला उमड़ना मुश्किल है। पुरा गांव के श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर के कपाट अभी तक नहीं खुले हैं। राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के कांवड़िए सबसे पहले आते हैं, लेकिन इस बार कोई असमंजस की स्थिति है।
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सावन माह इस बार छह जुलाई से शुरू होगा। शिवरात्रि 19 जुलाई की है। ऐसे में कांवड़ यात्रा जून के आखिरी सप्ताह में शुरू होनी चाहिए, लेकिन संभव नजर नहीं आ रहा है। सबसे पहले राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के कांवड़िए आते हैं। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण कांवड़ यात्रा पर भी संकट के बादल हैं। हालात यह है कि सुरक्षा के लिहाज से श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर के कपाट तक अभी नहीं खोले गए हैं। कोरोना संक्रमण काल को देखते हुए कई राज्यों के कांवड़ियों को एक साथ सड़कों पर गुजरने की अनुमति मिलना मुश्किल है। श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी जयभगवान शर्मा बताते हैं कि जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उन्हें देखते हुए इस बार कांवड़ यात्रा मुश्किल लग रही है। इस पर अंतिम फैसला तो शासन को करना है। कई राज्यों से जुड़ी यात्रा है।
रोज बढ़ रहा संक्रमण, कैसे शुरू होगी यात्रा
बागपत। जून के आखिर में यात्रा शुरू हो जानी चाहिए था। सावन का महीना इस बार लग रहा है। लेकिन यात्रा के शुरू होने की संभावना नहीं है।
पहुंचते हैं 15 से 20 लाख कांवड़िए
बागपत। पुरा गांव के श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में 15 से 20 लाख कांवड़ियां भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
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प्रशासन ने शुरू नहीं की तैयारियां
बड़ौत। कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही प्रशासन तैयारियां शुरू कर देता है। मगर, इस बार अभी तक तैयारी शुरू नहीं हो सकी है। कांवड़ यात्रा मार्ग पर बिजली-पानी शौचालय, चिकित्सा कैंप आदि की व्यवस्थाओं के लिए पहले से तैयारी शुरू हो जाती है। एसडीएम बड़ौत दुर्गेश मिश्रा का कहना है कि कांवड़ यात्रा को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं प्राप्त हुई। यदि कोई आदेश आते है तो युद्ध स्तर पर तैयारियां कराई जाएगी।
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