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गली-गली बालश्रम, अब तक सिर्फ 19 चिन्हित

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बागपत। चाय की दुकानें, बाइक रिपयेरिंग, होटल और ढाबों पर बाल श्रम खुलेआम देखा जा सकता है। लॉकडाउन के बाद जैसे-जैसे दुकानें खुलनी शुरू हो गई है, फिर से बालश्रम बढ़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि श्रम विभाग ने जिले में सिर्फ 19 बाल श्रमिक ही चिह्नित किए हैं। वह भी लॉकडाउन से पहले। श्रम परिवर्तन अधिकारी परमानंद का दावा है कि जिले में खेकड़ा क्षेत्र की फैक्ट्रियों में बाल श्रम अधिक है। विभाग समय-समय पर अभियान चलाता है। लोगों को जागरूक करता है। जैसे ही दुकानें खुली हैं, फिर से कार्य योजना बनाकर अभियान चलाया जाएगा।
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उजाला करेगी बाल श्रमिक विद्या योजना
बागपत। बाल श्रम को रोकने के लिए अब जिले में भी बाल श्रमिक विद्या योजना लागू होगी। योजना में लड़के को एक हजार रुपये प्रति माह और लड़की को 12 सौ रुपये प्रति माह के हिसाब से धनराशि सरकार देगी। इसके अलावा कक्षा आठ से दस तक सालाना छह हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। शुक्रवार से सूबे में यह योजना लागू की गई है।
स्टाफ कम, कैसे हो बाल श्रम पर निगरानी
बागपत। श्रम परिवर्तन विभाग में सिर्फ छानबीन के लिए श्रम परिवर्तन अधिकारी ही तैनात हैं। उनके अलावा कार्यालय में दो क्लर्क और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। जिले में छापा और छानबीन के लिए कम से कम दस सदस्यों की जरूरत होती है। लेकिन शासन से अभी तक नियुक्ति नहीं हो सकी है।
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बच्चों का शोषण रोकने का दायित्व
बागपत। बाल संरक्षण अधिकारी दीपांजलि कहती हैं कि श्रम प्रवर्तन का कार्य अलग है, लेकिन उनका विभाग भी बच्चों को शोषण से बचाता है। शिकायत मिलते ही वह टीम के साथ मौके पर पहुंचती हैं।
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