शहजाद राय शोध संस्थान पहुंचे मुनि महाराज, किया गया स्वागत
बड़ौत। जैन मुनि प्रवर्तक आशीष मुनि और उत्तम मुनि ने शुक्रवार को शहजाद राय शोध संस्थान में संग्रहीत दुर्लभ पांडुलिपि संग्रह का अवलोकन किया। प्राचीन पांडुलिपियों को देखकर प्रवर्तक आशीष मुनि ने कहा कि यहां का संग्रह अतिविशिष्ट श्रेणी का है, जिसके आधार पर सैकड़ों शोधार्थी शोध एवं अनुसंधान का कार्य संपन्न कर सकते हैं!
संस्थान में आगमन पर दोनों मुनियों का स्वागत करते हुए निदेशक डॉ अमित राय जैन ने शहजाद राय शोध संस्थान के बारे में जानकारी दी। बताया कि संग्रहीत करीब ढाई हजार दुर्लभ पांडुलिपियों का अभी तक डिजिटाइजेशन स्कैनिंग का प्रथम चरण पूरा कर लिया गया है। डिजिटाइजेशन के बाद द्वितीय चरण के रूप में इनका सूचीकरण और तृतीय चरण में इन दुर्लभ पांडुलिपि संग्रह का संरक्षण एवं रासायनिक उपचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि डिजिटाइजेशन का कार्य श्रुत भवन संशोधन संस्थान पुणे की टीम के सहयोग से किया गया है। इस ऐतिहासिक महत्व के कार्य को राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप प्रदान करने करने के लिए आचार्य सम्राट शिव मुनि महाराज का आशीर्वाद और वैराग्यरति विजय महाराज का दिशा निर्देशन प्राप्त हो रहा है।