सार
बागपत में 95 हजार किसान गन्ना भुगतान न मिलने से परेशान हैं। बागपत और रमाला सहकारी चीनी मिलों पर करोड़ों का बकाया है, जबकि सरकार 14 दिन में भुगतान का दावा करती है। किनौनी और मलकपुर मिलों ने अब तक एक रुपये का भुगतान भी नहीं किया।
गन्ना भुगतान की खबर से संबंधित फोटो। बागपत चीनी मिल के बाहर खड़ी गन्ने से लदी ट्रेक्टर-ट्रालिय
सरकार भले ही गन्ने का भुगतान 14 दिन में कराने का दावा करती हो मगर बागपत व रमाला सहकारी चीनी मिलें भुगतान करने में पिछड़ रहीं हैं। गन्ना बकाया भुगतान नहीं होने से किसान परेशान हैं, क्योंकि गन्ने के सहारे ही 95 हजार किसानों के परिवार का गुजारा होता है।
जिले में 95 हजार से अधिक किसान हैं और उनका गन्ना सात चीनी मिलों में जाता है। इनमें तीन मिल बागपत की हैं तो अन्य चीनी मिल मेरठ, शामली व मुजफ्फरनगर जिले की हैं। प्रदेश सरकार ने जहां 14 दिन में भुगतान करने की घोषणा कर रखी है, लेकिन यहां तो सहकारी चीनी मिल ही 14 दिन में भुगतान नहीं कर पा रही हैं। बागपत चीनी मिल पर 18 दिन का आठ करोड़ रुपये से अधिक बकाया चल रहा है तो रमाला चीनी मिल पर 24 दिन का 40 करोड़ रुपये किसानों का गन्ने का बकाया है।
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बागपत मिल ने अभी तक सिर्फ 15 नवंबर तक का ही भुगतान किया है। रमाला मिल ने 13 नवंबर तक का भुगतान कर दिया है। ऐसे में किसानों के सामने परेशानी खड़ी हो रही है। किसानों ने चीनी मिलों से निर्धारित समय में भुगतान कराने की मांग की है।
मलकपुर व किनौनी चीनी मिल ने अभी तक एक रुपया भी गन्ना भुगतान नहीं किया है। किनौनी मिल में जिले के किसानों का तीस करोड़ रुपये का गन्ना पहुंच चुका है तो मलकपुर मिल में 80 करोड़ रुपये से अधिक गन्ने की आपूर्ति हो चुकी है। दोनों मिलों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है, ताकि किसानों का भुगतान कराया जा सके।