बागपत/अमीनगर सराय। दशलक्षण पर्व के आठवें दिन शुक्रवार को श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में भगवान श्री पारसनाथ की प्रतिमा को मंदिर प्रांगण में पांडुकशिला पर विराजमान किया गया। भगवान की शांतिधारा मुकुल जैन, अनिल जैन, इंद्रसेन जैन, आलोक जैन, ऋषभ जैन, आकाश जैन ने की।
नित्य नियम की पूजा और उसके उपरांत उत्तम त्याग धर्म की पूजा प्रारंभ हुई। जिसमें श्री अष्टम पूजाधिकार विधान का आयोजन किया गया। शुभम जैन, अर्नव , प्रेरणा, नितिन आदि परिवार की तरफ से विधान का आयोजन किया गया। जैन समाज के लोगों ने मंदिर प्रांगण में विराजमान श्री पारसनाथ भगवान के सन्मुख बनाए मांडले पर 54 अर्घ्य चढ़ाए। उत्तम त्याग धर्म पर प्रकाश डालते हुए मयंक जैन ने बताया कि दान चार प्रकार के होते हैं। जिनका सभी संसारिक मनुष्य को समय-समय पर दान करते रहना चाहिए। सांध्यकालीन कार्यक्रमों में सबसे पहले 48 दिवसीय भक्तामर स्त्रोत का पाठ किया गया। इसके बाद महाआरती हुई।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में नाटिका प्रतियोगिता, धार्मिक क्रियाएं और भजन गायन किया गया। नाटिका प्रतियोगिता के सभी विजेताओं को जैन सेवा संघ बागपत द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पीयूष जैन, पंकज जैन, मुन्ना जैन, अतुल जैन, संजीव जैन, विनीत जैन, कामिनी, सुषमा, सुशीला, पालकी, बबीता आदि मौजूद रहे। मयंक जैन ने बताया कि 21 सितंबर को श्री 1008 भगवान पारसनाथ की पालकी यात्रा सुबह आठ बजे बड़ा जैन मंदिर से प्रारंभ होकर पास में बनी पंडूकशिला पर अभिषेक के उपरांत संपन्न होगी। वहीं, मुन्नालाल एंक्लेव में श्री1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में भगवान श्रीजी की पूजा अर्चना की गई।
अमीनगर सराय में उत्तम त्याग धर्म की आराधना की गई। वहीं, तीन लोक महामंडल विधान में अर्घ्य चढ़ाए। बच्चों ने धर्म संबंधी प्रश्नों के उत्तर दिए। शिवम शास्त्री ने श्रद्धालुओं को उत्तम त्याग धर्म के बारे में विस्तार से बताया। त्याग की भावना परोपकार की भावना होती है। सभी को त्याग की भावना को अंगीकार करना चाहिए। धर्मसभा में जयकुमार जैन, राजेश जैन, अरुण जैन, पारस जैन, अंकित, रितिक आदि मौजूद रहे।