बागपत। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर (आईआईटी कानपुर) ने ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें विभिन्न संस्थानों के 500 से अधिक युवा शोध विद्वानों ने भाग लिया। उन्हें संबोधित करते हुए डॉ. राम करन शर्मा ने कहा कि आने वाले समय में विज्ञान के दम पर ही भारत फिर से विश्व गुरु का दर्जा हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने मानवता के लिए विज्ञान के महत्व की फिर से पुष्टि की है। विज्ञान समाज की सभी समस्याओं के समाधान खोजने में मदद कर सकता है और हमारे सामने आने वाली कई बड़ी चुनौतियों को हल करने में सहायता कर सकता है। ‘‘एक छोटे से गांव से अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक की रोमांचक यात्रा‘‘। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल डॉ. राम करन शर्मा की एक छोटे से गांव ट्यौढ़ी से आईआईटी दिल्ली और फिर अमेरिका और अब एक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक बनने तक की प्रेरणादायक यात्रा के बारे में हर शोध छात्र जानना चाहता था।
डॉ. राम करन की प्रारंभिक शिक्षा ट्यौढ़ी गांव के प्राइमरी स्कूल में हुई। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से पीएचडी की और फिर अमेरिकी सरकार की एएसएम फैलोशिप पाकर अमेरिका चले गए। इसके बाद डॉ. राम करन को एंजाइमों पर शोध करने के लिए सऊदी अरब स्थित किंग अब्दुल्ला इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से बुलावा आया। वहां अब वे यूरोपियन एवं अमेरिकी वैज्ञानिकों के साथ शोध कर रहे हैं। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से पुरस्कार मिले हैं।
मध्यम परिवार में जन्म लेकर गांव में पालन पोषण होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान हासिल करने तक की उनकी यात्रा मजबूत इरादों, दृढ़ विश्वास और निरंतर प्रयास का बेहतरीन उदाहरण है। उनकी यात्रा हजारों युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।