जिला पंचायत अध्यक्ष पद के अब अनारक्षित घोषित होने की संभावना
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण में बदलाव की पूरी संभावना है। आरक्षण बदलता है तो जिले की सियासत में सरगर्मी भी बढ़ जाएगी। पहले अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित की सीट अब अनारक्षित घोषित होने की पूरी संभावना है। ऐसे में सीट के दावेदारों की संख्या बढ़ना तय है। साथ ही इस सीट पर आंखें टिकाए बैठे राजनीतिक दलों के नेताओं की आपसी खेमा बंदी भी खुलकर सामने आ सकती है।
बागपत जिला पंचायत सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित की गई तो सामान्य व ओबीसी वर्ग के दावेदारों के अरमानों पर पानी फिर गया था। उनकी चुनाव लड़ने की सारी तैयारी धरी रह गई थी। नये दावेदार सामने आने लगे थे। अब सोमवार को आए हाईकोर्ट के आदेश के बाद 2015 को मूल वर्ष मानने पर आरक्षण सूची में बदलाव तय माना जा रहा है। ऐसे में जिला पंचायत चुनाव लड़ने की आस छोड़ चुके दावेदार फिर से इस सियासी रण में कूद पड़ेंगे। जिला पंचायत का चुनाव एक बार फिर रोचक होने की संभावना जताई जा रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष का पद लगातार तीन कार्यकाल से वर्तमान विधायक योगेश धामा के परिवार का कब्जा रहा है। फिलहाल उनकी पत्नी रेनू धामा जिला पंचायत की अध्यक्ष हैं। इससे पूर्व खुद योगेश धामा जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। जबकि उनसे पहले भी रेनू धामा ही इस पद पर रहीं। इस बार देखना है कि यह पद इसी परिवार के पास रहता है या कोई नया चेहरा इस पर काबिज होता है।
जिले में छिड़ सकती है गैंगवार
- जिला पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के बीच पूर्व में बागपत की सियासत गरमा गई थी। भाजपा नेताओं की आपसी तकरार भी खुलकर सामने आने लगी थी। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल पड़ा था। सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई तो सियासी माहौल भी ठंडा पड़ गया था। आरक्षण में बदलाव के बाद अब दोबारा से माहौल गरमा सकता है। कुछ कुख्यात बदमाशों के परिजन भी चुनावी समर में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में चुनाव के दौरान जिले में गैंगवार शुरू की भी आशंका लोग जता रहे हैं।
हाईकोर्ट ने 2015 को आधार मानकर आरक्षण जारी करने के निर्देश
चुनाव की तैयारियों में जुटे प्रत्याशियों के समीकरण बिगड़े
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। हाईकोर्ट ने सोमवार को आरक्षण की सुनवाई करते हुए सरकार को 2015 के आधार पर आरक्षण निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। इससे अब आरक्षण के समीकरण बदलने तय हैं। चुनाव की तैयारी में जुटे संभावित प्रत्याशियों की चिंता बढ़ गई है। कई प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने के समीकरण बिगड़ गए हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सरकार ने 1995 को आधार मानकर आरक्षण सूची जारी की थी। जिले में तीन मार्च को आरक्षण की अंतिम सूची जारी की थी। इस पर आठ मार्च तक आपत्ति दर्ज कर 13 मार्च को अंतिम सूची के प्रकाशन निर्धारित किया जाना था। 12 मार्च को हाईकोर्ट ने आरक्षण सूची पर रोक लगा दी थी। सोमवार को आरक्षण सूची पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 2015 को आधार मानकर आरक्षण सूची जारी कर चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के आरक्षण को लेकर जारी किए आदेश के बाद चुनाव की तैयारी में जुटे प्रत्याशियों के समीकरण बिगड़ गए हैं। प्रत्याशियों की चुनाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रत्याशियों को आरक्षण को लेकर चिंता सता रही है, कहीं उनकी तैयारी धरी न रह जाए।
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