संवाद न्यूज एजेंसी
अग्रवाल मंडी टटीरी। रमजान मुबारक महीना है। ऐसा कुरान मजीद नाजिल किया गया। यह महीना लोगों का रहनुमा है। इसमें हिदायत के साफ हुक्म है कि जो शख्स यह महीना पाए तो उसे रोजे जरूर रखने चाहिए। यह बात कस्बे की मस्जिदों में मौलवियों व इमाम ने अपनी तकरीर में कही।
कस्बे में मौलवी हाजी जहीर अहमद ने कहा कि जो इंसान मरीज हो या सफर में हो तो वह बाद में उस रोजे को रख सकता है। अल्लाह अपने बंदे के लिए आसानी चाहता है शक्ति नहीं। जो शुरू से आखिर तक रमजान के रोजे रखता वह अपने तमाम गुनाहों से पाक और साफ हो जाता है। वह बिल्कुल उस बच्चे के सामान पाक व साफ हो जाता है जो बिल्कुल मासूम और बेगुनाह होता है। रमजान मुबारक में जिस कदर खैरात और सदका हो सके और जितनी तौबा की जा सके करनी चाहिए। हैवानी से बचना चाहिए और लोगों पर जुल्म नहीं करना चाहिए। वह लोग खुश किस्मत होते हैं जो इस बरकत के महीने का फायदा उठाते हैं। यह महीना सब्र का है। इस महीने में जो व्यक्ति एक फर्ज नमाज अदा करेगा उसे 70 फर्ज नमाज का सबाब मिलेगा। मस्जिदों में पहले रमजान को नवाज पढ़ने वालों की भीड़ रही। बच्चों ने भी नवाज में बढ़ चढ़कर भाग लिया। शाम को मस्जिद में सभी के साथ मिलकर रोजा खोलना सवाब है। ईशा की नमाज के बाद सभी को तरावीह जरूर पढ़नी चाहिए और अपने अल्लाह से गुनाहों की माफी की दुआ करनी चाहिए।
दूसरा रोजा
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रोजा इफ्तारी
सुन्नी 6: 40 बजे शाम
शिया 6:35 बजे शाम
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तीसरा रोजा
सहरी
सुन्नी 4: 40 बजे सुबह
शिया 4:45 बजे सुबह