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कई कॉलोनियों की पहचान, कच्ची सड़क, पक्के मकान

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महावीर एंक्लेव में भरा दूषित पानी - फोटो : BAGHPAT
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20 साल बाद भी नगर पालिका कई जगह पेयजल और सीवर लाइन नहीं डलवा सकी
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गलियां भी नहीं बनवाई गई, कीचड़ से भरे रास्तों से गुजरते है लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। 20 साल में जिस तरह से शहर की आबादी व दायरा बढ़ा है, उस तरह से सुविधाएं नहीं बढ़ सकी है। अधिकांश कालोनियों में रहने वाले लोगों को सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। किसी जगह पानी की लाइन नहीं बिछवाई गई तो किसी तरह पानी निकासी की समस्या है। लोग कई बार नगर पालिका से लेकर अन्य अधिकारियों को समस्या से अवगत करा चुके है। उसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। कई कॉलोनियों में तो गांवों से भी बदतर हालात है।
बागपत में बीस साल पहले दिल्ली व बड़ौत रोड पर केवल सीमित मकान बने हुए थे और शहर केवल पुराने कस्बे व बाजार तक सीमित था। आबादी बढ़ने लगी और गांवों से लोग शहर में आकर रहने लगे तो बड़ौत रोड, दिल्ली रोड, मेरठ रोड पर कई कालोनियां बस गई। कालोनियां बसने के बावजूद आजतक लोग सुविधाओं के लिए तरस रहे है। बड़ौत रोड पर महावीर एंक्लेव व दिल्ली रोड पर गुलाब वाटिका का हाल है। इन दोनों जगहों पर लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। पेयजल की समस्या बनी रहती है तो बारिश में पानी की निकासी नहीं होने से लोगों को समस्या से जूझना पड़ता है। इन दोनों जगह कई गलियों का निर्माण तक नहीं हुआ है। लोग कई बार नगर पालिक के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों से समस्याओं के निस्तारण की मांग कर चुके है, लेकिन उसके बाद भी कुछ नहीं हुआ।
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कालोनी में पेयजल की समस्या बनी हुई है, क्योंकि यहां पानी की लाइन नहीं बिछवाई गई है। बारिश में पानी की निकासी भी नहीं होती है। इसके अलावा खड़ंजा भी खराब हो चुका है। किसी भी समस्या का समाधान नहीं किया जाता है। बीस साल बाद भी हालात काफी खराब है। लोकेंद्र हेवा, महावीर एंक्लेव
बीस साल बाद भी सुविधाओं के लिए तरस रहे है। रास्ते तक नहीं बनवाए गए है और सफाई भी नहीं कराई जाती है। इनके अलावा भी बारिश में जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है। नगर पालिका को समस्याओं का समाधान कराना चाहिए। रेशमा तोमर, गुलाब वाटिका
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कालोनी में बीस साल भी स्थिति नहीं सुधर सकी है और यहां पानी की निकासी नहीं होती है। गलियों का निर्माण भी नहीं कराया गया है। जिसका निर्माण कराया गया था, वह भी धंसने लगा है। इस तरह से आज भी सुविधाओं के लिए जूझ रहे है। मुनेश तोमर, गुलाब वाटिका
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