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पंचमुखी महादेव में लव कुश ने थाम लिया था भगवान श्रीराम का घोड़ा

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मंदिर स्थित पंचमुखी महादेव - फोटो : BAGHPAT
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बालैनी। वाल्मिकी आश्रम और पंचमुखी महादेव मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। किवदंती के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि लक्ष्मण जब सीता को बालैनी गांव के जंगल में छोड़कर चले गए थे। तब यहां वाल्मिकी आश्रम में सीता ने शरण ली और लव-कुश को जन्म दिया। इस स्थान पर लव-कुश ने भगवान राम के घोडे़ को रोक लिया था। यह भी कहा जाता है कि माता सीता हिंडन नदी से जल भरकर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करती थीं।
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जिला मुख्यालय से करीब लगभग 26 किलोमीटर बालैनी के वाल्मिकी मंदिर में विराजमान पंचमुखी शिवलिंग है। पंचमुखी शिव की पूजा-अर्चना करने कई राज्यों से श्रद्धालु यहां आते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी महंत लक्ष्य देवानंद महाराज बताते हैं कि पंचमुखी महादेव की पूजा-अर्चना करने के लिए दूरदराज से लोग आते हैं और मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। पंचमुखी महादेव मंदिर माता सीता द्वारा पूजित सिद्धपीठ स्थान है। लव-कुश ने जन्म लेकर इस स्थान की कीर्ति बढ़ाई।
कई राज्यों से आते है श्रद्धालु
महंत लक्ष्य देवानंद महाराज बताते हैं कि जिले ही नहीं बल्कि हरियाणा, दिल्ली, पंजाब समेत कई राज्यों में मंदिर की महत्ता है। श्रद्धालु दूर-दराज से मंदिर में भगवान पंखमुखी महादेव की पूजा करने के लिए आते हैं। सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए माता सीता की पूजा करके आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
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मंदिर में स्थापित है माता सीता की मूर्ति
मंदिर में लव-कुश के साथ माता सीता की मूर्ति स्थापित है। लव-कुश के जन्मदिन पर प्रत्येक साल आख्या तीज पर मंदिर में मेला लगाया जाता है। श्रावण और फाल्गुन मास में श्रद्धालु भगवान शिव पर गंगाजल चढ़ाकर मन्नते मांगते हैं और पंचमुखी महादेव श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।
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