यहां लोग कर रहे घुड़सवारी की खबर से संबंधित फोटो। छपरौली में घोड़े के साथ भूपेंद्र शर्मा। स्रो
बागपत। यहां लोग पालतू पशुओं के शौकीन हो रहे हैं। यह पशुगणना में पता चला है। लोग घुड़सवारी खूब कर रहे हैं तो पहली बार जिले में पौनी तथा टर्की की एंट्री भी हो गई। आवारा कुत्तों का आंतक मिला तो कुछ घरों के आंगन खरगोश तथा बत्तखें मन को सुकून देती नजर आई। वहीं पशुगणना में प्रदेश में टॉप-10 में शामिल होने और मेरठ मंडल में बागपत का पहला स्थान आने पर पशुपालन विभाग के अधिकारी गदगद है।
पशुपालन विभाग बागपत के 281 गांव और नौ नगर निकायों के 140 वार्डों में पशुगणना करा रहा है। अब तक 2.05 लाख परिवार कवर कर जिले की 90 प्रतिशत पशुगणना हो चुकी हैं। बाकी 10 प्रतिशत पशुगणना का काम चल रहा। पशुपालन विभाग के अनुसार, अब तक 79351 गोवंश, 1.76 लाख 629 भैंस-भैंसा मिले। भेड़, बकरी और शूकर पालन कर लोग कमाई करने में पीछे नहीं है। 3650 भेड़, 13 हजार बकरी तथा 6171 शूकर पालन होता मिला है।
बागपत में 862 घोड़े मिले, जिनपर लोग घुड़सवारी करते हैं। 140 खच्चर भी लोगों के पास है तो यहां गधे केवल नौ मिले। सुखद बात यह सामने आई कि पहली बार जिले में चार पौनी यानी छोटे घोड़े तथा दो टर्की पक्षी, दो ऐमू का पालन होता मिला। 220 बत्तखों की चहचहाट सुनाई पड़ी है। घरों में 60 खरगोश भी इधर से उधर दौड़ते रहते हैं। गणनाकारों को 1940 कुत्तें भी मिले। रेगिस्तान का हवाई जहाज कहे जाने वाले ऊंट भी 43 मिले है। हालांकि अभी पशुगणना फाइनल होनी बाकी है, जिससे पशुओं की संख्या में उल्टफेर होनी तय है।