बागपत में हेडमास्टर सतपाल शर्मा की हत्या खिंदौड़ा पुलिया पर ही की जानी थी, लेकिन बदमाशों को वहां पर मौका नहीं मिला। हेडमास्टर बाइक तेजी से निकाल कर ले गए।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक ग्राम मवी कलां से पकड़े शूटर गौरव ने इस बात का खुलासा किया है। गौरव ने बताया प्रधानाध्यापक सतपाल की हत्या स्कूल में नहीं करनी थी। उनका प्लान खिंदौड़ा-अमीनगर सराय मार्ग पर खिंदौड़ा पुलिया के पास का था। वहां पर वे खड़े भी थे, लेकिन मास्टर सतपाल शर्मा वहां से अपनी बाइक से तेजी से निकल गए थे। वहां पर वे उनकी हत्या करने में कामयाब नहीं हो पाए थे। मजबूरन उन्होंने स्कूल में वारदात को अंजाम दिया।
पहले नलकूप पर स्नान किया, फिर मिठाई खाई
बागपत। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी गौरव ने गांव में पहुंचकर पहले एक नलकूप पर स्नान किया। उसके बाद मिठाई खाई। इसके बाद वह गांव के एक जिम्मेदार व्यक्ति के पास गया।
अमरीकन के परिवार को दिलवाऊंगा 10 लाख
बागपत। पुलिस सूत्रों की माने तो गौरव ने बताया सतपाल की हत्या के बाद अमरपाल से मिलने उसकी पत्नी जेल में गई। सोनू उर्फ शिशुपाल की मौत पर अमरपाल ने कहा उसके परिवार को दस लाख रुपये दिलवाएं जाएंगे।
अमरपाल की पत्नी पुलिस हिरासत में
बागपत। पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर अमरपाल की पत्नी और शूटर रोहित के पिता को हिरासत में ले लिया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। हालांकि आला पुलिस अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं।
हिस्ट्रीशीटर अमरपाल की पत्नी से गौरव फोन पर करता था बातें
बागपत। कोतवाली पुलिस के सूत्रों के अनुसार सतपाल की हत्या के संबंध में हिस्ट्रीशीटर अमरपाल की पत्नी से शूटर गौरव बातें करता था। अमरपाल की पत्नी के मोबाइल फोन पर उसकी 60-70 कॉल मिली हैं। लगातार उससे बात की गई है। इसका खुलासा सर्विलांस से हुआ है।
हत्या पर होगा बवाल, दुर्घटना में मार देना
बागपत। पुलिस सूत्रों का कहना है आनंद के परिवार की एक महिला ने शूटरों से कहा था सतपाल की हत्या की तो भारी बवाल होगा। इसलिए बाइक की टक्कर मारकर उसे मौत के घाट उतार देना। किसी को उन पर शक भी नहीं होगा।
तीनों शूटरों ने मारी थी सतपाल को गोली
बागपत। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गौरव ने पूछताछ में बताया सबसे पहले सतपाल को गोली सोनू उर्फ शिशुपाल ने मारी थी। दूसरे नंबर पर उसने खुद (गौरव), तीसरे नंबर पर रोहित ने गोली मारी थी। रोहित दीवार कूदकर खेत के रास्ते फरार हुआ था। वह बाइक लेकर भागा था। वह संपर्क मार्ग से होता हुआ बड़ौत पहुंचा। इसके बाद अपने गांव निरपुड़ा।