संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। नगर के 20 स्वर्णकारों के करोड़ों रुपये के जेवर लेकर फरार हुए पश्चिम बंगाल के दो कारीगरों में से एक मोहम्मद आयुष शेख को जमानत मिल गई है। पुलिस चार दिन की पूछताछ में उससे जेवर बरामद नहीं कर पाई। बताया कि कारीगर ने जेवर बेचकर बनाए दुकान और मकान बना लिए हैं। अब कारीगर यहीं रहकर व्यापारियों के रुपये चुकाएगा, जिस पर व्यापारियों ने भी सहमति जताई है।
बताया गया कि पश्चिम बंगाल के कारीगर मोहम्मद आयुष शेख और मोहम्मद मिनहान शेख 28 अप्रैल को फरार हो गए थे। वे नगर के सौरभ जैन, राजीव जैन, आर्जव, सिद्धार्थ जैन, रविंद्र वर्मा समेत 20 स्वर्णकारों का करोड़ों रुपये का सोना-चांदी लेकर भागे थे। दोनों कारीगरों के खिलाफ कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
पुलिस ने मंगलवार को एक आरोपी मोहम्मद आयुष शेख को पकड़ लिया था। उससे चार दिनों तक गहन पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, कारीगर इतने ज्यादा जेवर लेकर नहीं गया था जितने बताए गए। कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे शुक्रवार देर शाम जमानत पर छोड़ दिया गया।
पुलिस पूछताछ के दौरान मोहम्मद आयुष शेख से कोई जेवर बरामद नहीं हुआ।
उसने बताया कि उसने जेवर बेचकर मकान व दुकान बना लिए हैं। जांच अधिकारी दीक्षित कुमार ने पुष्टि की कि कारीगर से कोई जेवर बरामद नहीं हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत पर छोड़ा गया है।
पुलिस से कारीगरों का सत्यापन करने की मांग की
सराफा एसोसिएशन बड़ौत के अध्यक्ष आलोक जैन ने बताया कि संबंधित कारीगर एक करोड़ रुपये से अधिक के जेवर लेकर गया था। उसने इन जेवरों का उपयोग अपने पैतृक गांव में मकान और दुकान जैसी संपत्तियां बनाने में किया। यह जानकारी तब सामने आई जब व्यापारियों ने अपने बकाया की वसूली के लिए उससे संपर्क किया। इस मामले को लेकर व्यापारियों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। पुलिस अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में कारीगर ने अपनी गलती स्वीकार की। कारीगर ने व्यापारियों को यहीं रहकर काम करने और धीरे-धीरे सभी व्यापारियों के रुपये चुकाने का प्रस्ताव दिया है। सभी व्यापारियों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई है। एसोसिएशन ने पुलिस से कारीगरों का सत्यापन करने की भी मांग की है।