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सुख और दुख हमारे कर्मों पर निर्भर हैं : आचार्य विशुद्ध सागर

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फोटो संख्या 5
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बड़ौत। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि जीवन में मनुष्य द्वारा किएं गए कार्यों का फल उसे इसी जीवन में भुगतना पड़ता है, इसलिए मर्यादा में रहकर काम करें, क्याेंकि हर चीज की मर्यादा निहित है।
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जैनमुनि बृहस्पतिवार को अजितनाथ सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि धूपबत्ती की मर्यादा समय होती है। अपनी मर्यादा के अंतर्गत वह अपनी सुगन्ध छोड़ती है, जब उसकी समय की मर्यादा पूरी हो जाती है, तो वह राख बन जाती है। कहा कि कभी-कभी देखने को मिलता है कि तीव्र पुण्यात्माजीव की बहुत सारी विभूति एकक्षण में विलीन हो जाती है। इसलिए जीवन में मर्यादा में रहकर ही कार्य करने चाहिएं। सभा का संचालन वरदान जैन ने किया। इस अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन और पाद प्रक्षालन का सौभाग्य विकास कुमार, अंकुर जैन को प्राप्त हुआ। सभा में सुभाष जैन, अशोक जैन, हंस कुमार जैन, सुधीर जैन, जितेंद्र एडवोकेट, विनोद एडवोकेट शामिल रहे।
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