बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांति विधान में रविवार को श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ 120 अर्घ्य समर्पित कर भगवान चंद्रप्रभु की पूजा अर्चना की।
विधान में पंडित प्रदीप पीयूष जयकुमार जैन ने कहा कि दूसरों से ईर्ष्या, घृणा करने वाला, असंतोषी, क्रोधी, सदा शक करने वाला मनुष्य सदा दुखी रहते है। उन्होंने कहा कि यह संसार का नियम है कि जैसा बीज बोओगे, वैसा ही फल प्राप्त करोगे। इसलिए अनुरोध है कि अच्छे कर्म ही करो और दुखों से बचो। शुभ कर्म करने से सुख वैभव और पाप कर्म करने से दुःख मिलता है। अपना किया हुआ कर्म ही सब जगह फल देता है। बिना कर्म किए कोई फल नहीं भोगा जा सकता, इसलिए मनुष्य को ऐसे कर्म ही करने चाहिए, जिनका फल वह निशंक और प्रसन्न होकर भोग सके। विधान में संजीव जैन, मुकेश जैन, अंकित जैन, राजकुमार जैन, आशा जैन आदि शामिल रहे।