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फसलों पर टिड्डी दल का खतरा, विभाग अलर्ट

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बड़ौत। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन से जारी पूर्वानुमान के अनुसार जनपद में टिड्डी कीट के प्रवेश होने की संभावना है। कीट से बचाव के लिए सुरक्षात्मक उपाय अपनाना जरूरी है। ताकि कीट का प्रवेश जनपद में होने से रोका जा सके।
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दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित राजकीय बीज भंडार पर तैनात एडीओ कृषि रक्षा नरेश कुमार ने बताया कि उप कृषि निदेशक उप्र ने टिड्डी से बचाव के लिए निर्देशित किया है। टिड्डी दल के आक्रमण की दशा में सभी एक साथ टीन के डिब्बे, थाली, ढोल-नगाडा, डीजे आदि बजाकर शोर करें और कीटों को खेत में पौधों पर न बैठने दिया जाए। टिड्डी दल को पेड़ों पर रात्रि में विश्राम न करने दिया जाए। बालू मिट्टी टिड्डी के प्रजनन एवं अण्डे देने के लिए अनुकूल होती है। अत: टिड्डी दलों के आक्रमण से संभावित ऐसे क्षेत्रों में जुताई करवा कर जल भराव कर दिया जाए। ऐसी दशा में टिड्डियों के प्रजनन व वृद्धि की संभावना कम हो जाती है। खेत के किनारों पर गहरी नालियां बनाएं। नालियों में गिरने वाले इस कीट के शिशु को मिट्टी में दबा दिया जाए। इसके अलावा मैलाथियान 96 प्रति यूएलवी का छिड़काव भी सर्वोत्तम उपाय है। टिड्डी दलों के रात्रि प्रवास के समय ही इन पर संस्तुत कृषि रक्षा रासायनों तथा- क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी, क्लोरपायरीफॉस 50 प्रतिशत व साइपरमैशीन 5 प्रतिशत ईसी, लेम्डासाईहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी, मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी, डेल्टामैथीन 2.8 प्रतिशत ईसी, फिप्रोनिल 05 प्रतिशत एससी इत्यादि का छिड़काव कर इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।
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