बड़ौत। जैन मुनि विशुभ्र सागर महाराज ने कहा कि व्यक्ति जीवन में सबसे अधिक शरीर की देखभाल करता है। देह को सुंदर और पुष्ट करने के लिए कुछ भी अनर्थ करने को तैयार हो जाता है, लेकिन इस बीच वह ईश्वर को भूल जाता है। संकट आने पर ही नहीं, सुख में भी ईश्वर को याद करना चाहिए।
जैन मुनि रविवार को ऋषभ सभागार में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि तन का शृंगार मत करो, चेतन को निर्मल करो। चित्त की निर्मलता भविष्य में पवित्र भवो को प्रदान करती है। कर्म किसी को नहीं छोड़ता है। कर्म के वेग में बड़े-बड़े सम्राट भी परास्त हो जाते हैं। जीवन अमूल्य है, इसे पहचानो। कहा कि एक फूल अर्थी पर फेंका जाता है, एक फूल किसी सुन्दरी के गले में शोभायमान हो रहा है और एक फूल प्रभु के चरणों में चढ़ाया गया है। समझो। राग-द्वेष-मोह की मदिरा का त्याग करो। सभा में सुभाष जैन, राजकुमार जैन, हंस कुमार जैन, प्रमोद जैन, सुधीर जैन, वरदान जैन, विवेक जैन, अनुज जैन, राकेश जैन, जयप्रकाश जैन उपस्थित रहे।