फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निजी स्कूलों के शिक्षकों के हाथ में भविष्य की शिक्षक राजनीति

विज्ञापन
विज्ञापन
निजी स्कूलों के शिक्षकों के हाथ में भविष्य की शिक्षक राजनीति
विज्ञापन

भाजपा के चक्रव्यूह में फंस गए ओमप्रकाश शर्मा, 48 साल बाद मिली हार
सीबीएसई, डिग्री और वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों की बड़ी भूमिका
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। विधान परिषद की शिक्षक सीट पर ओमप्रकाश शर्मा की हार के साथ ही शिक्षक राजनीति ने करवट बदल ली है। लंबे समय तक एडेड और राजकीय स्कूलों के शिक्षक चुनाव के केंद्र बिंदु रहे थे, लेकिन इस बार निजी स्कूलों के शिक्षकों ने खुलकर मतदान किया तो पासा पलट गया। भविष्य की राजनीति में जीत-हार निजी स्कूलों के शिक्षकों के हाथ में होगी। माध्यमिक शिक्षक संघ के लिए यह खतरे की घंटी है।
शिक्षक सीट पर पूर्व एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा पिछले 48 साल से काबिज थे। ओमप्रकाश शर्मा की ताकत एडेट और राजकीय स्कूल के शिक्षक रहे हैं। इन्हीं को आधार बनाकर उन्होंने हमेशा चुनाव लड़ा। जिले में कुल वोट 2050 हैं, जिनमें एडेड और राजकीय स्कूलों के वोट सिर्फ 865 थे। सीबीएसई, निजी और डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के वोट बड़ी संख्या में बने और वोटिंग भी खूब हुई, जिससे भाजपा की जीत और ओमप्रकाश शर्मा की हार का रास्ता बना। भाजपा के रणनीतिकारों ने निजी स्कूलों के शिक्षकों पर सबसे ज्यादा फोकस किया। करीब पांच दशक बाद माध्यमिक शिक्षक संघ की हार से अब भविष्य की शिक्षक राजनीति प्राइवेट शिक्षकों के हाथ में जाती दिख रही है। एडेड और राजकीय स्कूलों के शिक्षक संख्याबल में निजी स्कूलों के शिक्षकों से पार नहीं पा सकते, ऐसे में शिक्षक राजनीति बदलना तय हो गया है।
विज्ञापन

गुटों में बंट गए थे शिक्षक
राजकीय और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक गुटों में बंटे हुए नजर आए, जिसका पूरा लाभ भाजपा प्रत्याशी को हुआ।
अधिक उम्र पर भी थे सवाल
चुनाव में भले ही शिक्षकों ने खुलकर पूर्व एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा का विरोध नहीं किया हो, लेकिन उनकी उम्र को लेकर भी सवाल और असंतोष उठ रहा था। चुनाव में बार-बार इसकी चर्चा उठती रही।
किसने क्या कहा
- माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य वीरेंद्र सिंह का कहना है कि निजी स्कूलों के शिक्षकों के अलावा क्लर्क और चतुर्थ श्रेणी स्टाफ के वोट भी भाजपा ने बनवाए। यह नियम विरुद्ध था, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
विज्ञापन

- भाजपा शिक्षक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष राजीव तोमर ने कहा कि वोट निजी स्कूलों के शिक्षकों का अधिकार था। उन्हें सरकार ने वोट की ताकत दी। शिक्षकों ने अपनी निष्ठा भाजपा की नीतियों में जताई, जिससे जीत हो सकी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें