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जिले के फनकारों को बहुत याद आए मोहम्मद रफी

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हर उम्र के लोग आज भी उनके गानों को खूब करते हैं पसंद
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अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। फनकार आते हैं और चले जाते हैं। लेकिन स्वर्गीय मोहम्मद रफी अपनी आवाज से आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है। हर उम्र के लोग उनकी आवाज और गानों के मुरीद हैं। रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया पर भी रफी के गाए गाने आज भी खूब सुने और गुनगुनाए जाते हैं।
भजन गायक प्रमोद अजमेरपुरिया का कहना है कि उन जैसा गायक फिर न होगा। सादगी उनकी पहचान रही। अपनी आवाज के दम पर आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है। कोई भी गाना हो या भजन उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ गाया।
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गायक जावेद सईद का कहना है कि बहारो फूल बरसाओ, ये रेशमी जुल्फें, मेरी दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे, जैसे अमर गाने उन्होंने गाए हैं। गायकों के लिए जैसे वह द्रोणाचार्य हैं। उनके बिना कोई महफिल पूरी नहीं होती।
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गायिका रेणुका पंवार का कहना है कि हर मूड का गाना गाना कोई उनसे सीखे। डूबकर गाने का हुनर उन्होंने लोगों को दिया। नई पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी के लिए भी वह हमेशा प्रेरणास्रोत बनें रहेंगे। ऐसे महान गायक सदियों में पैदा होते हैं।
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